राज्योत्सव प्रदर्शनी में आदिवासी विकास की झलक
रायपुर, 31 अक्टूबर 2010
छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण की दसवीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में यहां शासकीय विज्ञान महाविद्यालय के मैदान में आयोजित सप्ताह-व्यापी राज्योत्सव की विकास प्रदर्शनी में आदिम जाति और अनुसूचित जाति विकास विभाग का मंडप भी लोगों को खूब आकर्षित कर रहा है। प्रदेश की समृध्द आदिवासी संस्कृति को प्रदर्शित कर रहे इस मंडप में अनुसूचित जातियों और जनजातियों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए राज्य शासन द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं को चित्रों और मॉडलों के जरिए दर्शाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने भी कल रात आम नागरिकों की भारी चहल-पहल के बीच इस मंडप का अवलोकन किया।
मंडप में देवगुड़ी के सभी देवी-देवताओं को स्थापित किया गया है और सभी आने-जाने वाले को देवगुड़ी के देवताओं के बारे में जानकारी दी जा रही है। राज्य शासन द्वारा देवगुड़ी के विकास के लिए दस हजार रूपए की राशि दी जाती थी, जिसे बढ़ाकर 25 हजार रूपए कर दिया गया है। इस योजना में आठ हजार चार सौ गांव में देवगुड़ियों के विकास के लिए राशि स्वीकृत की जा चुकी है और वर्ष 2009-10 में एक हजार 440 देवगुड़ियों का विकास करने का लक्ष्य है।
विकास प्रदर्शनी में अनुसूचित जाति एवं जनजाति की युवतियों को एयर होस्टेस के प्रशिक्षण के लिए आकर्षित करने हेतु बड़े आकर्षक ढंग से हवाई जहाज का मॉडल एक पाईप के सहारे घूमते हुए दिखाया गया है। राज्य शासन द्वारा एयर होस्टेस का प्रशिक्षण नि:शुल्क दिया जाता है। इस योजना से अब तक अनुसूचित जनजाति के 26 युवतियां प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी हैं तथा 14 प्रशिक्षणरत हैं। अनुसूचित जाति की 19 युवतियां प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।
पायलेट प्रशिक्षण योजना को भी आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया गया है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग के तीन-तीन लोगों को प्रति वर्ष व्यवसायिक पायलेट लायसेंस के लिए नि:शुल्क पायलेट प्रशिक्षण्ा दिया जा रहा है। यह योजना 2007-08 से प्रारंभ की गयी है और वर्तमान में 09 अभ्यर्थी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। विकास प्रदर्शनी में कम्प्यूटर प्रशिक्षण योजना को भी आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया गया है। मुख्यमंत्री बाल भविष्य सुरक्षा योजना के तहत नक्सली हिंसा से पीड़ित बच्चों के कल्याण के लिए विशेष संस्थाएं संचालित की जा रही हैं। इसके तहत आस्था, निष्ठा, प्रयास, सहयोग नाम से आश्रम-विद्यालय बनाए गए हैं। इन भवनों के माडल प्रदर्शित किए गए हैं।
प्रदर्शनी में कटे-फटे होठ और तालू के इलाज को छायाचित्रों के माध्यम से दिखाया गया है। राज्य शासन द्वारा प्रदेशभर के कटे-फटे होठ और तालू के बच्चों और बड़ों के चेहरे पर मुस्कान लाने का काम किया जा रहा है। कटे-फटे होठ और तालू का नि:शुल्क आपरेशन के साथ ही आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग द्वारा आने-जाने का खर्च दिया जा रहा है।

