आदिवासी क्षेत्रों के चार सौ गांवों में साफ पानी के लिए सौर ऊर्जा पम्प लगेंगे
मुख्यमंत्री ने क्रेडा की बैठक में दिए कार्ययोजना बनाने के निर्देश
गोकुल नगर डेयरियों में भी गोबर गैस संयंत्र लगेंगे
रायपुर 05 दिसंबर 2011

मुख्यमंत्री
डॉ. रमन सिंह ने कहा है कि राज्य के आदिवासी इलाकों के चार सौ गांवों में
सौर ऊर्जा से चलने वाले पम्पों के जरिए ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध
कराया जाएगा। मुख्यमंत्री ने आज यहां मंत्रालय में आयोजित छत्तीसगढ़ राज्य
अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को
सरगुजा और बस्तर आदिवासी विकास प्राधिकरणों के जिलों में इन गांवों का चयन
जल्द करने और सोलर पम्प स्थापना के लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश
दिए।
डॉ. सिंह ने कहा कि दोनों प्राधिकरणों में दो-दो सौ ऐसे गांवों
को चिन्हांकित किया जाए, जहां पिछले कुछ वर्षों में उल्टी-दस्त जैसी
जलजनित संक्रामक बीमारी का प्रकोप देखा गया हो। डॉ. सिंह ने कहा कि इनमें
से प्रत्येक गांव में सौर ऊर्जा आधारित पम्प लगाने के लिए एक-एक लाख रूपए
के हिसाब से दोनों प्राधिकरणों के मद से चार करोड़ रूपए दिए जाएंगे।
मुख्यमंत्री के समक्ष क्रेडा की ओर से दिए गए प्रस्तुतिकरण में रंगीन
चित्रों सहित यह बताया गया कि कबीरधाम (कवर्धा) जिले के बैगा आदिवासी बहुल
कई गांवों में सोलर पम्प लगाकर ग्रामीणों को सिंचाई सुविधा के साथ स्वच्छ
पेयजल की भी आपूर्ति होने लगी है। मुख्यमंत्री ने इसे एक अच्छी सफलता बताते
हुए कहा कि सरगुजा और बस्तर प्राधिकरणों के जिलों में दुर्गम क्षेत्रों
में स्थित ऐसे दो-दो सौ गांवों का चयन कर वहां भी यह सुविधा दी जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने बैठक में राज्य के शहरों मे संचालित गोकुल नगर डेयरियों
में गोबर गैस संयंत्र लगवाने के लिए भी अधिकारियों को कार्ययोजना बनाने के
निर्देश दिए। डॉ. रमन सिंह ने यह भी कहा कि प्रदेश के समस्त छात्रावासों,
आश्रम शालाओं और ढाबों में लकड़ी के बड़े-बड़े चूल्हों के बदले गैसी फायर
लगाने के लिए भी अभियान चलाया जाए। गैसी फायर में लकड़ी के टुकड़ों और छिलकों
आदि का उपयोग किया जाता है। इससे काफी मात्रा में जलवाऊ लकड़ी की बचत होती
है।
बैठक में क्रेडा की ओर से प्रस्तुतिकरण में बताया गया कि बिजली
की बचत के हिसाब से छत्तीसगढ़ में सौर ऊर्जा का उपयोग लगातार बढ़ता जा रहा
है। राज्य के लगभग तीन सौ सरकारी अस्पतालों (सामुदायिक और प्राथमिक
स्वास्थ्य केन्द्रों) सहित करीब एक हजार चार सौ आदिवासी छात्रावासों और
आश्रम शालाओं में सूर्य की रौशनी से बिजली तैयार करने वाले सोलर फोटो
वोल्टाइक संयंत्र लगाए जा चुके हैं, जिनसे इन संस्थाओं को बिजली की
वैकल्पिक सुविधा मिल रही है। प्रदेश के नक्सल पीड़ित जिलों में भौगोलिक
दृष्टि से कठिन इलाकों में स्थित लगभग पांच सौ गांवों में सौर ऊर्जा आधारित
पेयजल पंप स्थापना की भी योजना बनायी गयी है। ऊर्जा विभाग के सचिव और
क्रेडा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमन कुमार सिंह, राज्य विद्युत
वितरण कम्पनी के प्रबंध संचालक श्री सुबोध कुमार सिंह और क्रेडा के
कार्यपालन निदेशक श्री एस.के.शुक्ला भी बैठक में उपस्थित थे।
क्रमांक-3988/स्वराज्य

