हमारे लोक कलाकार किसी से भी कम नहीं - श्री केदार कश्यप
राज्य स्तरीय गुरू घासीदास लोककला महोत्सव सम्पन्न
· एक लाख रूपए प्रथम पुरस्कार जय सतनाम बालिका पंथी पार्टी दुर्ग को
· द्वितीय पुरस्कार 75 हजार रूपए सूर्योदय पंथी पार्टी गाड़ा मोर जांजगीर को
· तृतीय पुरस्कार 50 हजार रूपए उपकार पंथी नृत्य दल कुटेसर रायपुर को
आदिम जाति और अनुसूचित जाति विकास मंत्री श्री केदार कश्यप ने आज यहां टिकरापारा स्थित गोड़वाना समाज के भवन में दो दिवसीय राज्य स्तरीय गुरू घासीदास
लोककला महोत्सव के समापन समारोह में विजेता पंथी दलों को पुरस्कार प्रदान कर अपनी बधाई और शुभकामनाएं दी। श्री कश्यप ने महोत्सव में जूरी द्वारा चयनित जय सतनाम बालिका पंथी पार्टी दुर्ग को प्रथम पुरस्कार के रूप में एक लाख रूपए, सूर्योदय पंथी पार्टी ग्राम-गाड़ामोर (जिला-जांजगीर-चाम्पा) को द्वितीय पुरस्कार के रूप में 75 हजार रूपए और उपकार पंथी नृत्य दल ग्राम -कुटेसर (जिला-रायपुर) को तृतीय पुरस्कार के रूप में 50 हजार की सम्मान राशि सहित प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया। श्री कश्यप ने महोत्सव में शामिल शेष सभी 21 पंथी दलों को सांत्वना पुरस्कार के रूप में प्रशस्ति पत्रों के साथ पांच-पांच हजार रूपए की सम्मान राशि के चेक प्रदान किए। समारोह की अध्यक्षता राजमहंत श्री सत्यनारायण सोनवानी ने की।
मुख्य अतिथि की आसंदी से समारोह में श्री केदार कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ के पंथी कलाकारों सहित राज्य के सभी लोक-कलाकारों में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। वे छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और लोक कला की कीर्ति को दूर देशों तक पहुंचा सकते हैं। सहज-सरल स्वभाव के हमारे मेहनतकश लोक कलाकार अपनी प्रतिभा और प्रस्तुति में किसी से भी कम नहीं हैं। उन्होंने कलाकारों का आव्हान किया कि वे अपने अच्छे प्रदर्शन से छत्तीसगढ़ की संस्कृति को देश-विदेश में पहचान दिलाएं। श्री कश्यप ने कहा कि मानवता के कल्याण के लिए गुरू घासीदास के बताये सिध्दांत आज भी प्रासंगिक और प्रेरणादायक हैं। श्री कश्यप ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में अनुसूचित जाति के सर्वांगीण विकास के लिए कई योजनाएं संचालित कर रही हैं।
उल्लेखनीय है कि गुरू घासीदास लोककला महोत्सव में राज्य के तेरह जिलों से 24 पंथी दलों के 625 कलाकारों ने भाग लिया। ये सभी पंथी दल जिले के प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय स्थान प्राप्त कर राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए चुने गए थे। सभी पंथी दलों ने महोत्सव में अपनी आकर्षक और रोमांचक प्रस्तुतियों से सबका मन मोह लिया। महोत्सव के समापन अवसर पर राज्य भर से आए अतिथि राजमहंतों ने भी पंथी नृत्य किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

