आदिवासियों के हित में योजनाएं बनाते समय मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखा जाए : श्री मॉरिस कुजूर
मंत्रालय में राज्य शासन के अधिकारियों के साथ बैठक सम्पन्न
रायपुर 24 अप्रैल 2010

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के उपाध्यक्ष श्री मॉरिस कुजूर ने आज यहां मंत्रालय में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा अनुसूचित जनजातियों के हित में संचालित योजनाओं की जानकारी ली। श्री कुजूर ने कहा कि छत्तीसगढ़ नवगठित राज्य होने के कारण यहां विकास की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने राज्य शासन द्वारा आदिवासियों के हित में संचालित योजनाओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि इन योजनाओं की बेहतर निगरानी से और अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे। उन्होंने कहा कि आदिवासियों के हित में योजनाएं बनाते समय मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखा जाए और आदिवासी क्षेत्रों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने शासन द्वारा आदिवासियों के पुनर्वास संबंधी नीति और विकास की अन्य योजनाओं की जानकारी ली। बैठक में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य श्री शेरिंग शेम्फल, मुख्य सचिव श्री पी जॉय उम्मेन सहित मंत्रालय के वरिष्ठ सचिव और अधिकारी उपस्थित थे।
मुख्य सचिव श्री उम्मेन ने आयोग को जानकारी दी कि राज्य शासन आदिवासियों के हित के लिए अनेक योजनाएं संचालित कर रही है और जिसका मैदानी स्तर पर समुचित क्रियान्वयन भी किया जा रहा है। शासन द्वारा आदिवासियों के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए अनेक प्रयास किए जा रहे है। खाद्य सुरक्षा प्रदान करने के लिए संचालित मुख्यमंत्री खाद्यान्न सुरक्षा योजना के तहत प्रदेश के 37 लाख से अधिक गरीब परिवारों को एक रूपए और दो रूपए किलो की दर से खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में विकास की योजनाओं को क्रियान्वित करने मे समस्याएं आती हैं, फिर भी शासन द्वारा आम जनता की बेहतरी के लिए हर संभव उपाय किए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ राज्य वन अधिकार अधिनियम के तहत सर्वाधिक पट्टा वितरण करने वाला प्रदेश है। यहां दो लाख 14 हजार से अधिक वनवासियों को वन अधिकार के पट्टे दिए गए हैं। इसके अलावा आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल आदि के समुचित इंतजाम किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि आदिवासी उपयोजना के तहत प्र्राप्त बजट का अधिक से अधिक उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने आयोग को आश्वस्त किया कि प्रदेश के सभी क्षेत्रों में आगामी जनगण्ाना का कार्य सम्पन्न कराया जाएगा। राज्य शासन द्वारा इसके लिए पूरे प्रयास किए जा रहे हैं।
राज्य शासन के सचिव, आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग, श्री आर.पी.मंडल ने विभाग द्वारा योजनाओं के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य में आदिवासी युवाओं के लिए अनेक अभिनव योजनाएं जैसे नर्सिग प्रशिक्षण योजना, पायलट प्रशिक्षण योजना, एयर होस्टेस प्रशिक्षण योजना आदि चलाई जा रही है। राज्य के अत्यंत प्राचीन आदिवासी समूहों (पी.टी.जी.) के उन्नयन के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। इन समूहों के बारहवीं पास विद्यार्थियों को तत्काल शिक्षाकर्मी में भर्ती किया जाता है। इनके लिए आवास भी बनाए गए हैं और इन्हें नि:शुल्क गणवेश, पुस्तके आदि दी जाती है। प्रदेश में दो हजार 516 आश्रम छात्रावास संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें एक लाख 32 हजार से अधिक विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। छात्रावासों में विद्यार्थियों को कम्प्यूटर शिक्षा भी दी जा रही है और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जा रहा है। बैठक में स्वास्थ्य, शिक्षा, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी आदि विभागों द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की भी जानकारी दी गयी। बैठक में आयोग के सचिव संयुक्त सचिव श्री आदित्य मिश्रा, आयोग के संचालक श्री आर.सी.दुर्गा, प्रमुख सचिव श्री एन.के.असवाल, प्रमुख सचिव श्री विवेक ढांड, निदेशक, जनगणना निदेशालय छत्तीसगढ़ श्रीमती रेणु पिल्ले, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद जबलपुर के प्रतिनिधि सहित सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

