नर्सिंग प्रशिक्षण का छत्तीसगढ़ मॉडल देश के लिए अनुकरणीय
योजना आयोग की बैठक में मिली प्रशंसा
आदिवासी और अनुसूचित जाति वर्ग की युवतियों को राज्य सरकार की मदद से मिलेगा गनियारी में नि:शुल्क प्रशिक्षण
चालू वित्तीय वर्ष से शुरू हो रही है योजना
राज्य बजट में 45 लाख रूपए का प्रावधान
रायपुर, 21 मई 2010
योजना आयोग ने छत्तीसगढ़ सरकार के आदिम जाति और अनुसूचित जाति विभाग द्वारा राज्य में संचालित सहायक नर्सिंग पाठयक्रम की विशेष योजना की प्रशंसा की है। आयोग ने इसे देश के अन्य राज्यों के लिए भी अनुकरणीय बताया है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की उपस्थिति में इस महीने की 19 तारीख को नई दिल्ली में आयोजित योजना आयोग की बैठक में आयोग की सदस्य श्रीमती सईदा हमीद ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की मुक्तकंठ से सराहना की। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ की वर्ष 2010-11 की वार्षिक योजना के अनुमोदन हेतु राज्य की विभिन्न महत्वाकांक्षी योजनाओं का प्रस्तुतिकरण दिया था।
आदिम जाति और अनुसूचित जाति विकास मंत्री श्री केदार कश्यप ने आज यहां बताया कि उनके विभाग द्वारा मुख्यमंत्री की विशेष पहल पर जनस्वास्थ्य सहयोग केन्द्र गनियारी, जिला बिलासपुर के सहयोग से राज्य की अनुसूचित जनजाति तथा अनुसूचित जाति वर्ग की युवतियों को सहायक नर्सिंग प्रशिक्षण हेतु तैयार करने के लिए एक विशेष प्रशिक्षण पाठयक्रम की योजना चालू वर्ष 2010-11 से शुरू की जा रही है। इस योजना के तहत चयनित युवतियों को गनियारी स्थित जन स्वास्थ्य सहयोग केन्द्र में नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार के बजट में 45 लाख रूपए का प्रावधान किया गया है। नर्सिंग प्रशिक्षण के इस सत्र में 50 बालिकाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। इनमें 30 अनुसूचित जनजाति और 20 अनुसूचित जाति की बालिकाएं शामिल हैं। प्रत्येक प्रशिक्षणार्थी के प्रशिक्षण पर लगभग 60 हजार रूपए खर्च किया जाएगा। प्रशिक्षणार्थियों के आवास हेतु 15 लाख रूपए की लागत से जनस्वास्थ्य सहयोग केन्द्र गनियारी द्वारा चलाए जा रहे अस्पताल परिसर में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा भवन निर्माण कराया जाएगा। नर्सिंग प्रशिक्षण की अवधि न्यूनतम छह माह निर्धारित है जिसकी अवधि जरूरत के मुताबिक बढ़ाई जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण पूण्र्ात: नि:शुल्क होगा और प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण के साथ-साथ प्रशिक्षण किट तथा आवास एवं भोजन की नि:शुल्क सुविधा उपलब्ध करायी जाएगी। छत्तीसगढ़ की मूल निवासी अनुसूचित जनजाति तथा अनुसूचित जाति के हाई स्कूल उत्तीर्ण बालिकाएं इस प्रशिक्षण के लिए आवेदन कर सकते हैं। नर्सिंग पाठयक्रम में प्रशिक्षण पश्चात इन बालिकाओं को तुरन्त नौकरी मिल सकेगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में तथा विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में नर्सो की कमी को देखते हुए नर्सिंग सहायकों की प्रशिक्षण योजना शुरू की जा रही है। इससे प्रदेश के अस्पतालों सहित जनसामान्य को इन प्रशिक्षित नर्सो की सेवाओं का लाभ मिल सकेगा।
आयोग की सदस्य श्रीमती सईदा हमीद ने छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के जनस्वास्थ्य सहयोग केन्द्र गनियारी में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नई दिल्ली के डॉक्टरों द्वारा पैरामेडिकल कर्मचारियों के साथ किए जा रहे सेवा कार्यों का भी उल्लेख किया। श्रीमती सईदा हमीद ने इस केन्द्र में ग्रामीणों विशेषकर गरीब, कमजोर तथा आदिवासी समुदाय के मरीजों, बीमार व्यक्तियों की नि:स्वार्थ सेवा को एक अभिनव प्रयास निरूपित करते हुए उसे पूरे देश के लिए अनुकरणीय बताया। उन्होंने इस योजना को सम्पूर्ण देश में लागू किए जाने की पुरजोर वकालत की।
आदिम जाति और अनुसूचित जाति विकास मंत्री श्री केदार कश्यप ने आज यहां बताया कि उनके विभाग द्वारा मुख्यमंत्री की विशेष पहल पर जनस्वास्थ्य सहयोग केन्द्र गनियारी, जिला बिलासपुर के सहयोग से राज्य की अनुसूचित जनजाति तथा अनुसूचित जाति वर्ग की युवतियों को सहायक नर्सिंग प्रशिक्षण हेतु तैयार करने के लिए एक विशेष प्रशिक्षण पाठयक्रम की योजना चालू वर्ष 2010-11 से शुरू की जा रही है। इस योजना के तहत चयनित युवतियों को गनियारी स्थित जन स्वास्थ्य सहयोग केन्द्र में नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार के बजट में 45 लाख रूपए का प्रावधान किया गया है। नर्सिंग प्रशिक्षण के इस सत्र में 50 बालिकाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। इनमें 30 अनुसूचित जनजाति और 20 अनुसूचित जाति की बालिकाएं शामिल हैं। प्रत्येक प्रशिक्षणार्थी के प्रशिक्षण पर लगभग 60 हजार रूपए खर्च किया जाएगा। प्रशिक्षणार्थियों के आवास हेतु 15 लाख रूपए की लागत से जनस्वास्थ्य सहयोग केन्द्र गनियारी द्वारा चलाए जा रहे अस्पताल परिसर में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा भवन निर्माण कराया जाएगा। नर्सिंग प्रशिक्षण की अवधि न्यूनतम छह माह निर्धारित है जिसकी अवधि जरूरत के मुताबिक बढ़ाई जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण पूण्र्ात: नि:शुल्क होगा और प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण के साथ-साथ प्रशिक्षण किट तथा आवास एवं भोजन की नि:शुल्क सुविधा उपलब्ध करायी जाएगी। छत्तीसगढ़ की मूल निवासी अनुसूचित जनजाति तथा अनुसूचित जाति के हाई स्कूल उत्तीर्ण बालिकाएं इस प्रशिक्षण के लिए आवेदन कर सकते हैं। नर्सिंग पाठयक्रम में प्रशिक्षण पश्चात इन बालिकाओं को तुरन्त नौकरी मिल सकेगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में तथा विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में नर्सो की कमी को देखते हुए नर्सिंग सहायकों की प्रशिक्षण योजना शुरू की जा रही है। इससे प्रदेश के अस्पतालों सहित जनसामान्य को इन प्रशिक्षित नर्सो की सेवाओं का लाभ मिल सकेगा।
आयोग की सदस्य श्रीमती सईदा हमीद ने छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के जनस्वास्थ्य सहयोग केन्द्र गनियारी में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नई दिल्ली के डॉक्टरों द्वारा पैरामेडिकल कर्मचारियों के साथ किए जा रहे सेवा कार्यों का भी उल्लेख किया। श्रीमती सईदा हमीद ने इस केन्द्र में ग्रामीणों विशेषकर गरीब, कमजोर तथा आदिवासी समुदाय के मरीजों, बीमार व्यक्तियों की नि:स्वार्थ सेवा को एक अभिनव प्रयास निरूपित करते हुए उसे पूरे देश के लिए अनुकरणीय बताया। उन्होंने इस योजना को सम्पूर्ण देश में लागू किए जाने की पुरजोर वकालत की।
क्रमांक - 901/सी.एल.

