श्री केदार कश्यप के विभागों की अनुदान मांगें पारित
आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के लिए 262521.80 लाख
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के लिए 313.74 करोड़ रूपए
रायपुर 24 मार्च 2011
छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज आदिमजाति एवं अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग और अल्प संख्यक विकास विभाग से संबंधित 2625 करोड़ 21 लाख 80 हजार रूपए और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग से संबंधित 313 करोड़ 73 लाख रूपए की आगामी वित्तीय वर्ष 2011-12 की अनुदान मांगों को ध्वनिमत से परित कर दिया। विभागीय मंत्री श्री केदार कश्यप ने अपने दोनों विभागों के लिए अनुदान मागों पर सदन में चर्चा का जवाब देते हुए सदस्यो को बताया कि आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के कुल बजट में अनुसूचित जनजाति के विकास के लिए 2373 करोड़ तीन लाख 70 हजार और अनुसूचित जाति के विकास के लिए 1773 करोड़ 33 लाख तथा पिछड़ा वर्ग एवं अल्प संख्यक विकास के लिए 74 करोड़ 84 लाख 10 हजार रूपए का प्रावधान किया गया है।
श्री केदार कश्यप ने सदन को बताया कि आदिम जाति और अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्प संख्यकों के विकास के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में राज्य सरकार इन वर्गो की सांस्कृतिक विरासतों के संरक्षण के साथ-साथ उनके शैक्षणिक सामाजिक और आर्थिक विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। राज्य सरकार इन वर्गो के समग्र विकास के लिए वचनबध्द है। श्री कश्यप ने बताया कि सदस्यों और जनप्रतिनिधियों द्वारा पेयजल, शैक्षनिक संस्थाओं, आश्रम शालाओं आदि की मांगो को शत्-प्रतिशत पूरा करने का प्रयास किया गया है। सदन में सदस्यों द्वारा जिन स्थानों में पेयजल व्यवस्था के लिए हेण्डपंप, नलजल योजना, जल प्रदाय आवर्धन योजना, आश्रम, शाला भवनों, शैक्षाणिक संस्थाओं आदि से संबंधी सभी मांगों को शीघ्र ही पूरा करने का हर सम्भव प्रयास किया जाएगा। उन्होने कहा कि अच्छा होता सदन में प्रमुख विपक्षी दल के सदस्यों और अन्य दल के सदस्य उपस्थित रहते तो उनके क्षेत्रों में पेयजल सहित शैक्षणिक संस्थाओं संबंधी जरूरतों की जानकारी भी सदन को मिलती और समस्याओं की समन्वित समाधान का प्रयास होता। श्री कश्यप ने बताया कि राज्य सरकार प्रदेश में पेयजल सहित सभी जरूरतों को पूरा करने वचन बध्द है।
मुख्यमंत्री बाल भविष्य सुरक्षा योजना :-
नक्सल हिंसा से अनाथ हुए, प्रभावित बच्चों को आवासीय शिक्षा उपलब्ध कराने हेतु जिला दक्षिण बस्तर के मुख्यालय दंतेवाडा में ''आस्था गुरूकुल आवासीय विद्यालय संचालित है । वर्ष 2011-12 में इसका विस्तर करते हुए व्यापक स्वरूप दिया जा रहा है। इसके अलावा नक्सल हिंसा से प्रभावित, अनाथ हुए परिवार के बच्चों की समुचित शिक्षा की व्यवस्था अशासकीय शैक्षणिक संस्थाओं के माध्यमों से भी की जा रही है। वर्तमान में राजनांदगांव में 142 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। नक्सल प्रभावित जिलों के कक्षा 10 वी उत्तीर्ण मेधावी छात्रों को उच्च शिक्षा ( 11 वीं एवं 12 वीं) उपलब्ध कराने तथा अध्ययन के साथ-साथ IIT, AIEEE, PMT, PET की कोचिंग देने हेतु रायपुर में ''प्रयास'' आवासकीय विद्यालय संचालित किया गया है । जिसमें 263 विद्यार्थी अध्ययनरत है । नक्सल प्रभावित जिलों में 11वीं एवं उच्च कक्षाओं में अध्ययनरत विद्यार्थियों को पृथक से प्रोत्साहन राशि दिये जाने की व्यवस्था की जायेगी। मुख्यमंत्री बाल भविष्य सुरक्षा योजना के लिए वित्तीय वर्ष 2011-12 के लिए तीन करोड रूपये का बजट प्रावधान प्रस्तावित किया गया है ।
प्रदेश में 15 माध्यमिक स्तर के 100 सीटर एवं 05 प्राथमिक स्तर के 50 सीटर अनुसूचित जनजाति आश्रम शालाऐं खोली जायेंगी। जिसके लिए वित्तीय वर्ष 2011-12 के बजट में दो करोड 66 लाख रूपए का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। इसी प्रकार प्रदेश में 10 प्री-मैट्रिक एवं 10 पोस्ट मैट्रिक 50 सीटर अनु0जनजाति छात्रावासों की स्थापना की जायेगी । इस हेतु आगामी वित्तीय वर्ष में एक करोड अट्ठाईस लाख रूपए का प्रावधान किया गया है। राज्य में 05 नवीन प्री मैट्रिक एवं 09 नवीन पोस्ट मैट्रिक अनुसूचित जाति बालक/कन्या 50 सीटर छात्रावासों खोले जायेंगे। जिसके लिए वर्ष 2011-12 के बजट में एक करोड सत्ताईस लाख साठ हजार रूपये का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है । प्रदेश में संचालित 92 अनुसूचित जनजाति आश्रमों में कुल 3880 सीटो की वृध्दि की जा रही है । इसके लिए वित्तीय वर्ष 2011-12 के बजट में एक करोड़ छियत्तर लाख तीस हजार का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। इसी प्रकार 32 अनुसूचित जनजाति प्री मेट्रिक छात्रावासों तथा 02 पो0मे0 छात्रावासों में कुल 1100 सीटो की वृध्दि की गई है । इस हेतु आगामी वित्तीय वर्ष में सीट वृध्दि के लिए शिष्यवृत्ति हेतु रूपये पैंतालीस लाख तथा पो0मे0 छात्रावासों में भोजन सहाय योजना हेतु दो लाख एवं आगमन भत्ता हेतु चालीस लाख का प्रावधान किया गया है।
प्रदेश में संचालित पो0मे0 अनुसूचित जाति छात्रावासों में 120 सीटों की वृध्दि की गई है। इस हेतु वित्तीय वर्ष 2011-12 के बजट में सीट वृध्दि के फलस्वरूप शिष्यवृत्ति हेतु नब्बे लाख, भोजन सहाय हेतु दो लाख तथा आगमन भत्ता हेतु अस्सी हजार का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है । विभागीय प्री-मैट्रिक छात्रावास एवं आश्रमों में प्रवेशित विद्यार्थियों को वर्ष 2008-09 में 350 से बढ़ाकर 450 रूपये प्रतिमाह की दर से वृध्दि की गई थी जिसे बढ़ाकर वर्ष 2011-12 से रूपये 650 प्रतिमाह की गई है, तथा वर्ष 2010-11 के शिक्षा सत्र से मान्यता प्राप्त अशासकीय संस्थाओं में प्रवेशित विद्यार्थियों को भी रूपये 650 प्रतिमाह की दर से शिष्यवृत्ति प्रदान की जायेगी। जिसके लिए वर्ष 2011-12 के बजट में पन्द्रह करोड का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है । प्रदेश में संचालित 40 हाइस्कूलों को उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में उन्नयन किया गया है । इसके लिए वित्त वर्ष 2011-12 के बजट में रूपये तीन करोड़ अस्सी लाख रूपए का बजट प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। दंतेवाडा एवं सुकमा में कन्या शिक्षा परिसर की स्थापना की जा रही है । जिसके लिए वित्त वर्ष 2011-12 के बजट में रूपये चालीस लाख का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।
रायपुर में 300 सीटर अनुसूचित जनजाति कन्या छात्रावास के भवन निर्माण स्वीकृत किया गया है। इसके लिए वित्त वर्ष 2011-12 के लिए रूपये एक करोड बजट प्रावधान प्रस्तावित किया गया है । इसी प्रकार जिला जगदलपुर के कोण्डागांव में पोस्ट मैट्रिक कन्या/बालक छात्रावास के भवन निर्माण स्वीकृत किया गया है । इस हेतु आगामी वर्ष में चालीस लाख रूपये का बजट प्रावधान प्रस्तावित किया गया है । 50 सीटर पोस्ट मैट्रिक अनुसूचित जाति कन्या छात्रावास राजनांदगांव एवं रायपुर के भवन निर्माण स्वीकृत किये गये है । इस हेतु वर्ष 2011-12 के बजट में रूपये एक करोड पच्चीस लाख का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। प्रदेश में संचालित प्राथमिक शालाओं में अध्ययनरत समस्त बालिकाओं को नि:शुल्क गणवेश प्रदाय किये जाने का निर्णय लिया गया है । जिसके लिये वित्तीय वर्ष 2011-12 के बजट में छै करोड बहत्तर लाख सत्तर हजार का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है । ''मुख्यमंत्री ज्ञान प्रोत्साहन योजना'' अंतर्गत वर्ष 2007-08 से अनुसूचित जनजाति के 700 तथा अनुसूचित जाति के 300 मेद्यावी छात्रों को रूपये 10 हजार प्रति विद्यार्थी के मान से प्रोत्साहन राशि दी जा रही हैं। वर्ष 2011-12 के लिए 1 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
''विशेष कोचिंग योजना'' अंतर्गत छात्रावास तथा आश्रम शालाओं में रहने वाले कक्षा 8वीं से 12वीं के विद्यार्थियों को कठिन विषयों यथा विज्ञान, गणित एवं अंग्रेजी में छात्रावास में ही कोचिंग दी जा रही है। इससे 50 हजार से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे है। वित्तीय वर्ष 2011-12 के बजट में राशि रूपये 02 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। ''छात्र भोजन सहाय'' पो.मैट्रिक छात्रावासियों को भोजन व्यय में सहायता हेतु ऐसे छात्र-छात्राये जो मेस में सम्मिलित होते है प्रतिमाह 200 रूपये की दर से प्रति सत्र 10 माह के लिए राशि उपलब्ध कराई जाती है। योजनान्तर्गत वर्ष 2010-11 में अनुसूचित जाति 3025 एवं अनुसूचित जनजाति 10717 छात्र/छात्राएं लाभान्वित हो रहे हैं। वर्ष 2011-12 में रूपये 02 करोड़ 48 लाख का प्रावधान किया गया हैं। ''स्वस्थ तन स्वस्थ मन'' स्वास्थ्य सुविधा विहीन क्षेत्रों में स्थित विभागीय छात्रावास आश्रमों के बच्चों को स्वस्थ्य रखने के लिए नियमित स्वास्थ्य परीक्षण हेतु स्वस्थ तन स्वस्थ मन योजना लागू की गई । योजना में वर्ष 2010-11 में 600 से अधिक संस्थाओं में अनुसूचित जाति के 11212 तथा अनुसूचित जनजाति वर्ग के 51675 विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं। योजना हेतु वर्ष 2011-12 के बजट में रूपये 90 लाख का प्रावधान किया गया है।
''जवाहर उत्कर्ष योजना'' प्रदेश के ग्रामीण एवं आदिवासी अंचलों के प्रतिभावान अनुसूचित जनजाति के छात्र-छात्राओं को प्रवेश दिलाकर प्रतिस्पर्धात्मक बनाने की यह विभाग की विशिष्ट योजना हैं। वर्ष 2008-09 से योजना के लक्ष्य में वृद्वि के फलस्वरूप 150 के स्थान पर 200 नये छात्र प्रतिवर्ष उत्कृष्ठ विद्यालयों में प्रवेश प्राप्त कर सकेंगें। वर्ष 2008-09 से यह योजना अनुसूचित जाति के लिए लागू की गई है। योजना से अब तक अनुसूचित जनजाति के 1187 छात्र-छात्रायें तथा अनुसूचित जाति के 130 छात्र-छात्रायें लाभान्वित हुए है। योजना हेतु वर्ष 2011-12 के बजट में रूपये 15 करोड़ 80 लाख का प्रावधान किया गया है। प्री मेडिकल एवं प्री इंन्जिनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी हेतु अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के 100 छात्र/छात्राओं को कोंचिंग दी जायेगी। इस हेतु वर्ष 2010-11 बजट में नवीन योजना के रूप में रूपये 80 लाख का प्रावधान किया गया है। जिन्हें भिलाई के तीन कोचिंग संस्थाओं में प्रवेशित किया गया है। प्री-मेडिकल के 30 विद्यार्थी एवं प्री- इंजीनियरिंग के 40 विद्यार्थी योजना से लाभान्वित हो रहे है।
अखिल भारतीय सिविल सेवा परीक्षा (यू.पी.एस.सी.) की प्रारंभिक परीक्षा में सफलता प्राप्त करने वाले अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति के अभ्यार्थियों को मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार की तैयारी हेतु प्रोत्साहन स्वरूप एकमुश्त राशि प्रति अभ्यार्थी रूपये 01 लाख का अनुदान देने हेतु नवीन योजना के रूप में वर्ष 2011-12 के बजट में रूपये 14 लाख का प्रावधान किया गया हैं। अनुसूचित वर्ग के युवतियों को रोजगार उपलब्ध कराने की दृष्टि से विभाग द्वारा ''एअर होस्टेज प्रशिक्षण योजना'' लागू की गई हैं। योजना अंतर्गत वर्ष 2006-07 से 2009-10 तक अनुसूचित जनजाति की 36 युवतियां प्रशिक्षित हुई है, इनमें से 10 युवतियों को रोजगार प्राप्त हुआ है। अनुसूचित जाति वर्ग की 17 युवतियां प्रशिक्षित हुई है, जिनमें 10 युवतियां प्रशिक्षणरत है और 2 युवतियां रोजगार में स्थापित हो चुकी है। वर्ष 2010-11 में अब तक अनुसूचित जनजाति वर्ग की 21 एवं अनुसूचित जाति वर्ग की 23 युवतियों का प्रशिक्षण हेतु चयन किया गया है । इस योजना में अनुसूचित जनजाति वर्ग में प्रति प्रशिक्षणार्थी रूपये 90 हजार तथा अनुसूचित जाति हेतु प्रति प्रशिक्षणार्थी रूपये 98 हजार 600 का व्यय शासन द्वारा वहन किया जा रहा है।
युवकों के लिए ''पायलेट प्रशिक्षण योजना'' लागू की गई है, जिसमें प्रतिवर्ष अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के 3-3 छात्रों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य है। प्रत्येक प्रशिक्षणार्थी पर होने वाला व्यय रूपये 12 लाख 90 हजार शासन द्वारा वहन किया जा रहा हेै। वर्तमान में योजना अंतर्गत अनुसूचित जनजाति के 9 अनुसूचित जाति के 8 एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के 8 युवा प्रशिक्षणरत है। अब तक 3 युवकों ने प्रशिक्षण पूर्ण किया है एवं उन्हें सी.पी.एल. (कामर्शियल पायलेट लाईसेन्स) प्राप्त हो गया है। वित्तीय वर्ष 2011-12 के बजट में राशि रू0 135.00 लाख का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति वर्ग की छात्राओं को नर्सिंग पाठयक्रम हेतु नि:शुल्क अध्ययन की सुविधा वर्ष 2009-10 से प्रारंभ है, जिसमें अनुसूचित जनजाति तथा अनुसूचित जाति के 300 प्रशिक्षणार्थी युवक-युवतियां लाभांन्वित हो रहे है। वर्ष 2010-11 से इस योजना में 400 युवक-युवतियां लाभान्वित हो रहे हैं। इसके अतिरिक्त अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति की बालिकाओं को रोजगारपरक नर्सिंग सहायक प्रशिक्षण आवासीय सुविधा सहित प्रदान करने के लिए वर्ष 2010-11 में यह योजना प्रारंभ की गई है। चालू वर्ष में 15 अनुसूचित जनजाति एवं 10 अनुसूचित जाति वर्ग के प्रशिक्षणार्थी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहें हैं। यह प्रशिक्षण स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में कार्यरत संस्था जन स्वास्थ्य सहयोग केन्द्र, गनियारी, जिला बिलासपुर के माध्यम से दिया जा रहा है। वर्ष 2011-12 के बजट में योजनांतर्गत रूपये 7 करोड़ 17 लाख का बजट प्रावधान किया गया है।
प्रदेश में निवासरत अन्य पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों को अध्ययन में सुविधा प्रदान करने हेतु छात्रवृत्ति योजना क्रियान्वित की जा रही है। अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों को आय सीमा के आधार पर राज्य छात्रवृत्ति तथा पोस्ट मेट्रिक छात्रवृत्ति दी जाती है। वर्ष 2011-12 में प्री-मेट्रिक छात्रवृत्ति हेतु रूपये 24 करोड़ 50 लाख तथा पोस्ट मेट्रिक छात्रवृत्ति हेतु रूपये 35 करोड़ का बजट प्रावधान प्रस्तावित है। अल्प संख्यक समुदाय के छात्रों हेतु केन्द्र क्षेत्र योजना में मेरिट-कम-मीन्स तथा पोस्ट मेट्रिक छात्रवृत्ति एवं केन्द्र प्रवत्ति योजना में प्री-मेट्रिक छात्रवृत्ति योजना संचालित है। प्री-मेट्रिक छात्रवृत्ति योजना में रूपये 02 करोड़ 20 लाख, पोस्ट मेट्रिक छात्रवृत्ति हेतु रूपये 59 लाख तथा मेरिट-कम-मीन्स योजना हेतु रूपये 01 करोड़ 05 लाख का बजट प्रावधान वर्ष 2011-12 में प्रस्तावित किया गया है। बस्तर एवं दक्षिण क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण्ा बस्तर, दंतेवाड़ा एवं कांकेर जिलों को शामिल करते हुए बस्तर विकास प्राधिकरण का गठन किया गया था। वर्ष 2005-06 से इन जिलों के अतिरिक्त धमतरी, रायपुर, दुर्ग राजनांदगांव एवं कवर्धा में संचालित एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है। प्राधिकरण के माध्यम से क्षेत्रीय विकास के कार्यों से गति दी जा रही है। वर्ष 2010-11 तक प्राधिकरण मद से रूपये 160 करोड़ के 15703 कार्य स्वीकृत किये गये है। इस मद में वर्ष 2011-12 में विकास कार्यों के लिए रूपये 35 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।
सरगुजा एवं उत्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण :-
कोरिया, कोरबा, बिलासपुर, रायगढ़ एवं जशपुर जिलों की आदिवासी विकास परियोजनाओं को शामिल करते हुए गठित किये गये, सरगुजा एवं उत्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण के माध्यम से विकास कार्यो के लिए रूपये 35 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। वर्ष 2010-11 तक प्राधिकरण मद से रूपये 170 करोड़ के 3709 कार्य स्वीकृत किये गये है। इस मद में वर्ष 2011-12 में विकास कार्यों के लिए रूपये 35 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।
अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण :-
अनुसूचित जाति क्षेत्रों के विकास को गति देते हेतु अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण का गठन किया गया है। इस हेतु रूपये 35 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। वर्ष 2010-11 तक प्राधिकरण मद से रूपये 149 करोड़ के 4849 कार्य स्वीकृत किये गये है। इस मद में वर्ष 2011-12 में विकास कार्यों के लिए रूपये 35 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।
पण्डो विकास अभिकरण एवं भुंजिया विकास अभिकरण अंतर्गत पण्डो एवं भुंजिया जनजातियों के विकास हेतु कार्य कराये जा रहे है। इस हेतु वर्ष 2011-12 में रूपये 55-55 लाख का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।
विशेष पिछड़ी जनजातियों का विकास -
प्रदेश में पांच विशेष पिछड़ी जनजातियों - पहाड़ी कोरवा, बैगा, कमार, अबूझमाड़िया एवं बिरहोर के 24600 परिवार निवास करते हैं। इन जनजातियों की आबादी 114000 है। समाज की मुख्य धारा से अलग-थलग रहने के कारण इनके विकास पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है, ताकि ये समाज की मुख्य धारा से जुड़ सकें। इस हेतु भारत शासन को रू. 82 करोड़ की पंचवर्षीय कार्य योजना प्रेषित की गई है, जिसके विरूद्व 2009-10 तक रूपये 23 करोड़ 79 लाख 76 हजार प्राप्त हुए है । वर्ष 2010-11 हेतु रूपये 13 करोड़ 24 लाख 96 हजार की कार्ययोजना भारत सरकार को प्रेषित की गई है जिसपर स्वीकृति अपेक्षित है। वर्ष 2011-12 के बजट में 15 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।
प्रदेश में निवासरत जनजातीय वर्ग के लोगों के विकास के साथ-साथ नितांत आवश्यक है कि उनकी मूल संस्कृति भी सुरक्षित रहें। उनकी संस्कृति के परिरक्षण एवं संवर्धन के लिए सरकार द्वारा जनजातीयों के ग्रामों में स्थित देव स्थलों ''देवगुड़ी'' के विकास की योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिसके अंतर्गत प्रति ग्राम रूपये 25 हजार की अनुदान राशि प्रदान की जाती है। अब तक देवगुड़ी के विकास एवं पुर्न निर्माण हेतु रूपये 14 करोड़ 75 लाख की राशि से 9991 कार्य स्वीकृत किये गये है। वर्ष 2011-12 में देवगुड़ी के विकास के लिए रूपये 4 करोड़ 34 लाख का बजट प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।
श्री कश्यप ने बताया कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी द्वारा वित्तीय वर्ष 2011-12 में दो हजार समस्या ग्रस्त बसाहटों में राज्य मद से नलकुप खोदन के लिए दस करोड़ 80 लाख रूपए का बजट प्रावधान किया गया है। राज्य के ग्रामीण् क्षेत्रों में पेयजल के लिए दो लाख दस हजार हेण्ड पंप स्थापित किए गए हैं। इसके संधारण और मरम्मत के लिए 14 करोड़ 70 लाख रूपए का बजट प्रावधान किया गया हेै। राज्य में वित्तीय वर्ष 2011-12 में 16 बड़े ग्रामों में नलजल योजना एवं प्रगतिरत योजना के लिए 27 करोड़ रूपए का बजट प्रावधान किया गया है। इस वर्ष 144 नई स्थल जल योजनाएं प्रस्तावित है। इसके लिए दस करोड़ रूपए का बजट प्रावधान किया गया है। भू-जल संवर्धन के कार्यो के लिए 60 लाख के बजट प्रावधान है। शालाओं में पेयजल व्यवस्था के लिए 10 करोड़ रूपए। 12 नई नगरीय जल प्रदाया योजनाओं के लिए 86 करोड़ 60 लाख रूपए, और महाविद्यालयो में पेयजल व्यवस्था के लिए 20 लाख रूपए का बजट प्रावधान किया गया है।

