मंजिल तक पहुंचने लगे हैं अनुसूचित जाति और जनजाति के बच्चे
· लेख-छेदीलाल तिवारी
छत्तीसगढ़ के अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के बच्चे अब अपने मंजिल तक पहुंचने लगे हैं। इन वर्गों के लिए राज्य शासन द्वारा विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों का संचालन किया जा रहा है। जवाहर आदिम जाति, अनुसूचित जाति उत्कर्ष विद्यार्थी योजना के तहत अनुसूचित जाति और जनजाति
के प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को आवासीय विद्यालयों में प्रवेश दिलाकर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जाती है। गत वर्ष इस योजना से लाभान्वित होने वाले दो विद्यार्थियों ने आई.आई.टी. जैसी विशिष्ट संस्था में प्रवेश पाया। 16 विद्यार्थियों ने ए.आई.ईईई के माध्यम से देश के विभिन्न एनआईटी में प्रवेश लिया है। 54 विद्यार्थी पी.ई.टी. के माध्यम से विभिन्न इंजीनियरिंग कॉलेजाें में प्रवेश लिए है। अब तक इस योजना से एक हजार 30 विद्यार्थी अनुसूचित जनजाति के तथा 97 विद्यार्थी अनुसूचित जाति के लाभान्वित हो रहे हैं। वर्ष 2011-12 में 200 विद्यार्थी कक्षा छठवीं एवं 50 छात्राएं कक्षा 11वीं में प्रवेश ले चुकी है।
राज्य शासन द्वारा प्री-इंजीनियरिंग एवं प्री-मेडिकल कोचिंग योजना शुरू की गई है। इस योजना में 80 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले अनुसूचित जाति तथा जनजाति के विद्यार्थी जिनके पालक आयकर दाता न हो उन्हें राष्ट्रीय स्तर के इंजीनियरिंग कॉलेजों (आई.आई.टी. एवं एन.आई.टी.) में प्रवेश दिलाया जाता है। यह योजना वर्ष 2010-11 से शुरू की गई है। पहले वर्ष 34 अनुसूचित जाति और
जनजातियों के विद्यार्थियों द्वारा प्री इंजीनियरिंग की कोचिंग ली गई, जिसमें से 14 विद्यार्थियों ने ए.आई.ईईई के माध्यम से देश के विभिन्न एन.आई.टी में प्रवेश लिया है। वर्ष 2011-12 में 70 विद्यार्थियों को प्री इंजीनियरिंग एवं 30 विद्यार्थियों को प्री-मेडिकल कोचिंग देने का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री ज्ञान प्रोत्साहन योजना के तहत दसवीं एवं बारहवीं बोर्ड परीक्षा में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले अनुसूचित जाति तथा जनजाति के विद्यार्थियों को दस हजार रूपए का पुरस्कार दिया जाता है। वर्ष 2010-11 में कुल 937 विद्यार्थियों को दस-दस हजार रूपए की राशि प्रदान की गई है। वर्ष 2011-12 में 40 हाईस्कूलों को हायर सेकेण्डरी स्कूलों में उन्नयन किया गया है। इससे सूदुर आदिवासी क्षेत्र के छात्र-छात्राआें को बारहवीं तक की शिक्षा प्राप्त करने में सुविधा मिली है। सरस्वती सायकल प्रदाय योजना के तहत वर्ष 2010-11 में अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग की कुल 46 हजार 53 छात्राओं को सायकल वितरित किया गया। इस वर्ष 51 हजार से अधिक छात्राओं को सायकल वितरण का लक्ष्य है।
राज्य शासन द्वारा राज्य छात्रवृत्ति योजना के तहत इस वर्ष 2010-11 में कक्षा छठवीं से दसवीं तक की कक्षाओं में अध्ययनरत अनुसूचित जाति के तीन लाख 99 हजार 288, जनजाति के नौ लाख 60 हजार 630 एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के नौ लाख 23 हजार 593 छात्र-छात्राओं को 250 रूपए की दर से छात्रवृत्ति प्रदान की गई है। मेट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति योजना के तहत अनुसूचित जाति, जनजाति के कक्षा ग्यारहवीं एवं बारहवीं में अध्ययनरत छात्रों को जिनके पालकों की वार्षिक आय दो लाख रूपए तक हो उन्हें मेट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। वर्ष 2010-11 में अनुसूचित जाति के 61 हजार 968 विद्यार्थियों को 13 करोड़ 82 लाख 93 हजार तथा अनुसूचित जनजाति के कुल 88 हजार 545 विद्यार्थियों को 21 करोड़ 75 लाख 88 हजार रूपए की राशि वितरित की गई है। मेरिट कम मीन्स अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति (तकनीकी एवं व्यवसायिक पाठयक्रम) योजना के तहत अल्प संख्यक समुदाय के स्नातक पूर्व तथा स्नातकोत्तर स्तर पर तकनीकी एवं व्यवसायिक पाठयक्रमों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दी जाती है। योजना में वर्ष 2010-11 में 148 छात्र-छात्राएं लाभान्वित हुई, जबकि वर्ष 2011-12 में मेरिट कम मीनस छात्रवृत्ति हेतु 99, पोस्ट मेट्रिक छात्रवृत्ति हेतु दो हजार 601 तथा प्री मेट्रिक छात्रवृत्ति हेतु 13 हजार 377 नवीन छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति देने का लक्ष्य है।
अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए नि:शुल्क आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने के लिए राज्य में तीन हजार 65 छात्रावास एवं आश्रम संचालित है। इन छात्रावास आश्रमों में एक लाख 60 हजार से अधिक विद्यार्थियों को आवासीय सुविधा का लाभ मिला है। इन विद्यार्थियों को वर्ष 2011-12 में छात्रवृत्ति की राशि को बढ़ाकर 650 रूपए प्रतिमाह कर दिया गया है। मुख्यमंत्री बाल भविष्य सुरक्षा योजना के तहत नक्सली हिंसा से अनाथ हुए प्रतिभावान बच्चों को आवासीय शिक्षा उपलब्ध कराने हेतु आस्था, निष्ठा और प्रयास नामक आवासीय विद्यालय संचालित किया जा रहा है। आस्था, आवासीय विद्यालय दंतेवाड़ा में संचालित है। छात्र वर्ष भर इस संस्था में रहते हैं। सभी व्यवस्था नि:शुल्क है। वर्तमान में 185 विद्यार्थी आस्था में निवास कर रहे हैं। निष्ठा योजना के माध्यम से नक्सली हिंसा से प्रभावित हुए बच्चों के अध्ययन की व्यवस्था अशासकीय संस्था के सहयोग से की गई है। वर्तमान में राजनांदगांव में यह व्यवस्था है, जहां 138 विद्यार्थी अध्ययनरत है। 'प्रयास' संस्था में नक्सल प्रभावित जिलों के दसवीं उत्तीर्ण मेधावी छात्रों को ग्यारहवीं एवं बारहवीं की शिक्षा दिलाने तथा अध्यापन के साथ-साथ आई.आई.टी, ए.आईईईई, पी.एमटी. एवं पी.ई.टी. की कोचिंग देने हेतु रायपुर में आवासीय विद्यालय संचालित किया जा रहा है। वर्तमान में यहां पर कक्षा बारहवीं में 252 विद्यार्थी अध्ययनरत है और इस वर्ष सौ छात्रों को कक्षा ग्यारहवीं में प्रवेश दिलाया जाएगा।
छात्रावासी विद्यार्थियों के लिए विशेष शिक्षण केन्द्र योजना भी संचालित है। इस योजना का उद्देश्य अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति के छात्रावासों-आश्रमों में रहने वाले विद्यार्थियों को विशेष शिक्षण के माध्यम से कठिन विषयों जैसे गणित, विज्ञान, अंग्रेजी, वाणिज्य से संबंधित कमजोरी को दूर कर प्रावीण्यता बढ़ाना है। विशेष शिक्षण प्रदान हेतु 146 विकासखंड़ों पर विशेष शिक्षण केन्द्र योजना प्रारंभ की गई है। वर्ष 2010-11 में 36 हजार 780 विद्यार्थियाें को विज्ञान, गणित एवं अंग्रेजी जैसे कठिन विषयों में विशेष शिक्षा दी गई है। अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग के युवक-युवतियों को नर्सिंग पाठयक्रम की नि:शुल्क अध्ययन के लिए नर्सिंग प्रशिक्षण योजना संचालित है। इस योजना के तहत 670 बालक-बालिकाएं अध्ययनरत है और वर्ष 2010-11 में चार सौ युवक-युवतियों को लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है। राज्य शासन द्वारा अनुसूचित जाति और जनजातियों के समुचित विकास के लिए तीन विशेष क्षेत्र प्राधिकरणों का गठन किया गया है। इनमें बस्तर एवं दक्षिण क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण के तहत उत्तर बस्तर (कांकेर), दक्षिण बस्तर (दंतेवाड़ा) एवं एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना क्षेत्र नगरी, गरियाबंद, डौण्डी लोहारा एवं राजनांदगांव को शाामिल किया गया है। इसके माध्यम से स्थानीय विकास के कार्य किए जा रहे हैं। वर्ष 2010-11 में 35 करोड़ रूपए के 637 स्थानीय विकास एवं परिवार मूलक कार्य स्वीकृत किए गए हैं।
सरगुजा एवं उत्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण में सरगुजा, कोरिया, जशपुर एवं कोरबा जिलों सहित एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना क्षेत्र गौरेला एवं धर्मजयगढ़ शामिल हैं। इसके माध्यम से वर्ष 2010-11 में 34 करोड़ 99 लाख रूपए के 735 स्थानीय विकास एवं परिवार मूलक कार्य स्वीकृत किए गए है। अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण में रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, महासमुंद, कवर्धा, बिलासपुर, रायगढ़, कोरबा एवं जांजगीर जिलों को शामिल किया गया है। इसके माध्यम से अनुसूचित जाति बाहुल्य ग्रामों के विकास के लिए योजना स्वीकृत कर संचालित की जा रही है। वर्ष 2010-11 में 34 करोड़ 98 लाख रूपए के 892 स्थानीय एवं परिवार मूलक कार्य किए गए हैं।

