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गृह निर्माण सहकारी संस्थाओं की जांच समिति की बैठक

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When Jul 04, 2011
from 08:55 PM to 08:55 PM
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भू-खण्ड अथवा भवन खरीद-बिक्री के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र की अनिवार्यता समाप्त करने की अनुशंसा

संसदीय सचिव श्री बघेल की अध्यक्षता में जांच समिति ने की अनेक अनुशंसाएं

नामांतरण एक माह के भीतर अनिवार्य रूप से होना चाहिए

रायपुर, 04 जुलाई 2011

    सहकारिता विभाग के संसदीय सचिव श्री विजय बघेल की अध्यक्षता में गठित जांच समिति ने यह अनुशंसा की है कि राजधानी रायपुर की विभिन्न गृह निर्माण सहकारी समितियों से भू-खण्ड अथवा भवन की खरीद-बिक्री करने वालों को इन समितियों से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने की अनिवार्यता समाप्त की जाए और इसके लिए सहकारिता विभाग तथा पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग की ओर से परिपत्र जारी किया जाए। 1557-040711जांच समिति ने यह भी अनुशंसा की है कि गृह निर्माण सहकारी समितियों से खरीदे अथवा बेचे जाने वाले भवन या भू-खण्ड की खरीद-बिक्री का नामातंरण राजस्व रिकार्ड में एक माह के भीतर अनिवार्य रूप से कर दिया जाए। इसमें किसी भी प्रकार की अनियमितता बरतने वाली गृह निर्माण सहकारी समितियों के विरूध्द वैधानिक कार्रवाई की जाए।
    जांच समिति की बैठक आज यहां संसदीय सचिव श्री विजय बघेल की अध्यक्षता में उनके निवास पर आयोजित की गयी। बैठक में जांच समिति ने विभिन्न बिन्दुओं पर विचार-विमर्श कर अपने प्रतिवेदन में राज्य शासन को अनेक महत्वपूर्ण अनुशंसाएं की हैं। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने राजधानी रायपुर क्षेत्र में संचालित गृह निर्माण सहकारी समितियों के क्रिया-कलापों की जांच के लिए श्री बघेल की अध्यक्षता में इस समिति का गठन किया है। जांच समिति की आज की बैठक में समिति के सदस्य विधायक द्वय श्री देवजी भाई पटेल और श्री कुलदीप जुनेजा सहित कलेक्टर के प्रतिनिधि के रूप में श्री तारण सिन्हा और जांच समिति के सदस्य सचिव श्री एस.के.एस. सिसौदिया उपस्थित थे।
    जांच समिति ने आज की बैठक में यह भी अनुशंसा की है कि बिना नामांतरण वाले भवन निर्माण, बिजली कनेक्शन, भू-खण्ड का पुन: विक्रय या निर्मित भवन का विक्रय नहीं किया जाना चाहिए। इसके लिए शासन स्तर पर संबंधित विभागों के माध्यम से जरूरी निर्देश जारी किए जाएंगे। नामांतरण की कार्यवाही को सुविधाजनक बनाने के लिए शहर के विभिन्न स्थानों पर आवेदन पत्र प्राप्त करने तथा नामांतरण आदेश स्वीकृत करने की विशेष व्यवस्था की जाएगी।  इसे एक अभियान के तौर पर कलेक्टर रायपुर के नियंत्रण एवं निर्देश के अनुसार चलाया जाएगा।
    जांच समिति के अध्यक्ष श्री विजय बघेल ने बताया कि समिति का यह अभिमत है कि गृह निर्माण सहकारी समितियों से भूमि और मकान खरीदने के लिए क्रेता और विक्रेता को अनापत्ति प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं होनी चाहिए। जांच समिति ने राज्य शासन से इस आशय का परिपत्र सहकारिता विभाग तथा पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग के विभागाध्यक्ष द्वारा जारी किए जाने की भी अनुशंसा की है।  उन्होंने बताया कि भू-खण्ड का पुन: विक्रय किसी भी भू-स्वामी का वैधानिक अधिकार है, जो उसे संपत्ति अंतरण अधिनियम के अधीन प्राप्त होता है। अत: भू-खण्ड के पुन: विक्रय पर रोक संबंधी शर्तों तथा निबंधनों को गृह निर्माण सहकारी संस्था की उपविधियों, विक्रय पत्र प्रारूप आदि में से समाप्त करने की अनुशंसा जांच समिति द्वारा की गई है। भू-खण्ड अथवा निर्मित भवन के अंतरण पर गृह निर्माण सहकारी संस्थाओं द्वारा लिए जाने वाले पांच प्रतिशत शुल्क की व्यवस्था को समाप्त करने की अनुशंसा आज की बैठक में की गई। बैठक में समिति ने यह भी अभिमत व्यक्त किया कि गृह निर्माण सहकारी समितियों में नगर पालिका निगम द्वारा प्रदत्त कालोनाईजर अनुज्ञा तथा भवन निर्माण अनुज्ञा की शर्तों का पालन भी सुनिश्चित कराया जाना चाहिए। जांच समिति ने यह भी अनुशंसा की है कि प्रत्येक गृह निर्माण सहकारी संस्था में नियमों के तहत कलेक्टर के एक प्रतिनिधि और सहकारिता विभाग के उप-पंजीयक के एक प्रतिनिधि को अनिवार्य रूप से नामांकित कर शामिल किया जाना चाहिए। गृह निर्माण सहकारी संस्थाओं को ग्राम तथा नगर निवेश के संयुक्त संचालक द्वारा विकास अनुज्ञा प्रदान की जाती है जिसमें अनेक शर्तों का भी उल्लेख रहता है। श्री बघेल की अध्यक्षता में जांच समिति ने अनुशंसा की है कि इन शर्तों का पालन सुनिश्चित करवाने के लिए संबंधित शासकीय कर्मचारियों को विशेष रूप से दायित्व सौंपा जाना चाहिए।
    यह भी उल्लेखनीय है कि जांच समिति की पिछले वर्ष 15 जून और 14 जुलाई को आयोजित बैठकों में लिए गए निर्णय के अनुसार गृह निर्माण सहकारी संस्थाओं के लिए ग्राम तथा नगर निवेश विभाग द्वारा अनुमोदित ले-आउट और मापदण्डों के अनुरूप विकास कार्य, सड़क निर्माण, आमोद-प्रमोद, उद्यान, ई.डब्ल्यू. एस. मकान, बंधक भू-खण्डों की स्थिति और व्यावसायिक उपयोग के विस्तृत भौतिक सत्यापन के लिए दो टीमों का गठन किया गया था। इनके द्वारा अब तक 22 गृह निर्माण सहकारी समितियों के संबंध में प्रतिवेदन प्रस्तुत किए जा चुके है।

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