विकास कार्यों में गति लाने मैदानी अधिकारियों-कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय हो : श्री राजेश मूणत
नगरीय प्रशासन मंत्री ने की नगर निगमों के विकास योजनाओं की समीक्षा
नगर पालिक निगमों को 168 करोड़ 37 लाख रूपए आवंटित
रायपुर, 18 जनवरी 2011
राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के नगरपालिक निगमों को विभिन्न विकास कार्यों के लिए 168 करोड़ 37 लाख रूपए आवंटित किए गए हैं। नगरीय प्रशासन मंत्री श्री राजेश मूणत ने आज यहां प्रदेश के नगर पालिक निगमों में संचालित विकास योजनाओं एवं कार्यों की समीक्षा बैठक में सभी नगर पालिक निगमों
को धनराशि की स्वीकृति प्रदान की। श्री राजेश मूणत ने बैठक में नगरपालिक निगमों में संचालित विभिन्न विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा की और अधिकारियों से स्पष्ट रूप से कहा कि विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। श्री मूणत ने अधिकारियों को हर हाल में विकास कार्यों में गति लाने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा हर नगरपालिक निगम क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं के विकास के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध करायी जा रही है। इसके बाद भी अनेक नगरपालिक निगमों में विकास कार्यों में अपेक्षित प्रगति दिखाई नहीं दे रही है। सचिव नगरीय प्रशासन श्री आर.पी.मंडल, आयुक्त नगरीय प्रशासन श्री संजय शुक्ला सहित नगरीय प्रशासन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित थे। बैठक में रायपुर, दुर्ग, भिलाई, राजनांदगांव, जगदलपुर, बिलासपुर, कोरबा, चिरमिरी, अंबिकापुर और रायगढ़ नगर पालिका निगमों के आयुक्त उपस्थित थे।
श्री मूणत ने नगर पालिक निगमों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए राजस्व वसूली में वृध्दि करने तथा आय के स्थायी स्त्रोत विकसित करने को भी कहा। उन्होंने कहा कि इसके लिए नगर निगमों के सभी मैदानी अधिकरियों-कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। नगरीय निकायों का मूल कार्य जनता के लिए बुनियादी सुविधाएं विकसित करना है। संबंधित क्षेत्रों में पेयजल, साफ-सफाई, स्ट्रीट लाइट, बाजारों एवं उद्यानों में मूलभूत सुविधाएं विकसित करना, सुगम आवागमन, मास्टर प्लान के अनुरूप विकास कार्य करने जैसे कार्य अधिकारियों-कर्मचारियों के मूलदायित्व में शामिल होते हैं। अधिकारियों को इन कामों में अधिक ध्यान देना चाहिए। नगरीय प्रशासन मंत्री ने भागीरथी नलजल योजना और जल आवर्ध्दन योजनाओं की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को इन योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए समयबध्द कार्यक्रम बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नगरीय निकायों में पेयजल की व्यवस्था करने हर साल करोड़ों रूपए खर्च किए जाते हैं। इसके बाद भी पेयजल के लिए स्थायी व्यवस्थाएं नहीं हो पायी। गर्मियों के मौसम में हर वर्ष पेयजल की आपूर्ति की समस्या उत्पन्न होती है। उन्होंने अधिकारियों से यह भी कहा कि व्यवहारिक दृष्टिकोण अपनाते हुए जनता के व्यापक हित में विकास कार्यों को पूर्ण कराएं। श्री मूण्ात ने सभी नगरपालिक निगमों में दस लाख रूपए से अधिक के विकास कार्यों के लिए ई. टेडरिंग की प्रक्रिया अपनाने के निर्देश दिए। श्री मूणत ने यह भी कहा कि एक मद की राशि को दूसरे मद में खर्च करने की प्रवृत्ति पर रोक लगनी चाहिए।
नगरीय प्रशासन मंत्री ने नगर निगम आयुक्तों को हर दिन अपने कार्यालय में जनता से मुलाकात के लिए निर्धारित समय पर अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन तीन बजे से पांच बजे तक का समय जनता से मिलने के लिए निर्धारित है। इस अवधि में नगर निगम आयुक्तों की कार्यालय में उपस्थिति सुनिश्चित होनी चाहिए। आयुक्त के बाहर प्रवास पर होने की स्थिति में अन्य वरिष्ठ अधिकारी की उपस्थिति इस अवधि में सुनिश्चित हो। वेन्डर पॉलिसी और होंडिंग पॉलिसी के मापदण्ड का पालन करने के निर्देश भी बैठक में दिए गए। श्री मूणत ने सभी नगर निगम क्षेत्रों में खूद का पेट्रोल पम्प स्थापित करने का सुझाव देते हुए कहा कि नगर निगमों के पास उपलब्घ जमीनों की सुरक्षा सुनिश्चित कर उन जगहों में आय बढ़ाने के लिए अधोसंरचना विकसित की जानी चाहिए। उन्होंने सभी नगर निगम आयुक्तों को साफ-सफाई व्यवस्था की निगरानी करने के लिए प्रतिदिन सुबह 6 से 8 बजे तक भ्रमण करने के निर्देश भी दिए। नगरीय प्रशासन मंत्री ने नगर निगम क्षेत्रों में स्थापित महान विभूतियों की प्रतिमाओं पर प्रतिदिन माल्यार्पण करने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। इस कार्य के लिए एक कर्मचारी को जिम्मेदारी दी जाए। श्री मूणत ने कहा कि प्रदेश सरकार की नयी योजना 'श्रध्दांजलि योजना' का क्रियान्वयन भी सुनिश्चित किया जाए। इस योजना के तहत गरीब परिवारों को इनके परिवार में किसी की मृत्यु होने पर दाह संस्कार के लिए तत्काल एक हजार रूपए की सहायता दी जाएगी। श्री मूणत ने कहा कि जनता को मूलभूत सुविधाएं विकसित करना प्रदेश सरकार की प्राथमिकता में है। अधिकारी-कर्मचारी सरकार की इस प्राथमिकता को ध्यान में रखकर कार्य करें।
नगरीय प्रशासन सचिव श्री मंडल ने भी सभी आयुक्तों को जनता के हित को ध्यान में रखते हुए विकास योजनाओं और कार्यों में गति लाने के निर्देश दिए। श्री मंडल ने तत्कालीन मध्यप्रदेश सहित छत्तीसगढ़ के अनेक नगरीय निकाय क्षेत्रों में हुए उल्लेखनीय कार्यों का उदाहरण दिया और कहा कि अधिकारी अपने आपको आम जनता के बीच रखकर देंखे तो उन्हें विकास कार्यों में गति लाने के लिए प्रेरणा मिलेगी।
नगर पालिक निगमों को अधोसंरचना विकास मद में 151 करोड़ रूपए की स्वीकृति प्रदान की गयी है। इस राशि में से रायपुर नगर निगम को 29 करोड़ रूपए, दुर्ग 15 करोड़ 80 लाख रूपए, भिलाई 16 करोड़ 70 लाख रूपए, राजनांदगांव नौ करोड़ 50 लाख रूपए, जगदलपुर आठ करोड़ 58 लाख रूपए, बिलासपुर 24 करोड़ 80 लाख रूपए, कोरबा 17 करोड़ 30 लाख रूपए, रायगढ़ ग्यारह करोड़ रूपए, अम्बिकापुर दस करोड़ रूपए तथा चिरमिरी नगरपालिका निगम को नौ करोड़ रूपए आवंटित किए गए हैं। आवंटित राशि में से रायपुर नगर निगम के प्रत्येक वार्ड में बीस-बीस लाख रूपए तथा अन्य नगरपालिक निगमों के प्रत्येक वार्ड में दस-दस लाख रूपए के अधोसंरचना विकास के कार्य कराए जाएंगे। मरम्मत एवं संधारण मद में दसों नगरपालिक निगमों को आठ करोड़ छह लाख रूपए स्वीकृत किए गए हैं। इनमें रायपुर नगरपालिक निगम को दो करोड़ 27 लाख रूपए, भिलाई एक करोड़ 66 लाख रूपए, दुर्ग 69 लाख रूपए, राजनांदगांव 43 लाख रूपए, जगदलपुर तीस लाख रूपए, बिलासपुर 82 लाख रूपए, कोरबा 94 लाख रूपए, रायगढ़ 33 लाख रूपए, अम्बिकापुर 28 लाख रूपए और चिरमिरी नगरपालिक निगम को 28 लाख रूपए का आवंटन किया गया है। राज्य सरकार द्वारा नगरपालिक निगमों को मुद्रांक शुल्क की राशि आठ करोड़ 77 लाख रूपए आवंटित किए गए है।

