नगरीय निकायों में मिनी खेल परिसर बनेंगे : हर शहरी निकाय में एक मॉडल स्कूल बनाया जाएगा
नगरीय निकायों के निर्वाचित पदाधिकारियों के मानदेय में तीन गुणा वृध्दि
नगरीय प्रशासन, आवास एवं पर्यावरण और परिवहन विभाग की अनुदान मांगें पारित
रायपुर, 24 मार्च 2011
नगरीय प्रशासन, आवास एवं पर्यावरण तथा परिवहन मंत्री श्री राजेश मूणत ने आज यहां विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2011-12 के लिए संबंधित विभागों की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान घोषणा की कि शहरी क्षेत्र के युवाओं में खेलों के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने के लिए प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में मिनी खेल परिसर का निर्माण किया जाएगा। मिनी खेल परिसरों के निर्माण हेतु नगर निगमों को पांच-पांच करोड़ रूपए, नगर पालिकाओं को दो-दों करोड़ रूपए एवं नगर पंचायतों को एक-एक करोड़ रूपए दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नगरीय निकाय में एक-एक स्कूल को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसके लिए नगर निगमों को एक करोड़ रूपए, नगर पालिकाओं को 50 लाख रूपए, नगर पंचायतों को 25 लाख रूपए की राशि प्रदान की जाएगी। श्री मूणत ने नगरीय निकायों में मल्टीपरपस हॉल का निर्माण के लिए नगर निगमों को एक-एक करोड़ रूपए, नगर पालिकाओं को 50-50 लाख रूपए और नगर पंचायतों को 25-25 लाख रूपए देने की घोषणा की। उन्होंने नगरीय निकायों के निर्वाचित जन-प्रतिनिधियों के मानदेय में वृध्दि किए जाने की भी घोषणा की। अनुदान मांगों पर चर्चा के उपरांत नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के लिए 1334.65 करोड़ रूपए, आवास एवं पयार्वरण विभाग के लिए 512.14 रूपए तथा परिवहन विभाग के लिए 38.97 करोड़ रूपए का वार्षिक बजट ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
श्री मूणत ने कहा कि प्रदेश के नगर निगम क्षेत्रों में अधोसंरचना विकास में तेजी लाने के लिए इस वर्ष बजट में पहली बार सौ करोड़ रूपए के एकमुश्त अनुदान का प्रावधान किया गया है, जिसमें रायपुर नगर निगम क्षेत्र को राजधानी की गरिमा के अनुरूप विकसित करने के लिए 50 करोड़ रूपए उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने कहा कि नगरीय निकायों में स्थित झुग्गी झोपड़ी क्षेत्रों में पेयजल एवं शौचालयों की व्यवस्था के लिए बजट में सात करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है जहां शहरी क्षेत्रों में बेतरतीब तरीके से लगने वाले ठेलों और गुमटियों को सुव्यवस्थित रूप देने के लिए वेन्डर पॉलिसी लागू की गई है। इसी तरह शहरों में अव्यवस्थित रूप से लगे होर्डिंग्स को भी सुव्यवस्थित रूप देने और अवैध होर्डिंग्स पर नियंत्रण लगाने के लिए होर्डिंग पॉलिसी भी लागू की गई है, जिससे नगरीय निकायों को कई गुणा आय होने की संभावना है।
श्री मूणत ने कहा कि नगरीय निकायों में निर्माण कार्यों के लिए निविदा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी एवं प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए सभी नगरीय निकायों में दस लाख रूपए से अधिक लागत के निर्माण कार्यों की निविदा ई-टेंडरिंग के माध्यम से किया जाना अनिवार्य कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के नगरीय निकायों को स्वावलम्बी बनाने और उनके राजस्व में वृध्दि करने के लिए करों को युक्तिसंगत बनाया जा रहा है। नगरीय निकायों में लागू करों के निर्धारण के लिए जल्द ही एक नियामक आयोग का गठन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि राज्य में नगरीय आबादी तथा नगरीय निकायों की संख्या में वृध्दि को ध्यान में रखते हुए निकायों की कार्य-प्रणाली में कसावट लाने एवं प्रशासनिक नियंत्रण को प्रभावी बनाने के लिए जगदलपुर एवं अम्बिकापुर में नगरीय प्रशासन विभाग के नए क्षेत्रीय संयुक्त संचालक कार्यालय स्थापित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही रायपुर स्थित क्षेत्रीय संयुक्त संचालक कार्यालय को भी सुदृढ़ किया जा रहा है। श्री मूणत ने कहा कि नगरीय निकायों की आर्थिक स्थित में सुधार हेतु विभाग द्वारा विभिन्न निकायों के बकाया बिजली बिलों के निराकरण हेतु विद्युत मंडल को एकमुश्त 31.27 करोड़ रूपए का भुगतान कर निकायों को आर्थिक बोझ से राहत दिलायी गयी है। उन्होंने कहा कि 58 नवगठित नगर पंचायतों में बुनियादी अधोसंरचनाएं विकसित करने के लिए एवं नगर पंचायतों के लिए इस वर्ष बजट में 50-50 लाख रूपए का अनुदान स्वीकृत किया गया है।
श्री मूणत ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य गठन के समय नगरीय प्रशासन विभाग का वार्षिक बजट 133 करोड़ रूपए था, जो वर्ष 2011-12 में बढ़कर 1334 करोड़ रूपए हो गया है, अर्थात् विभाग के बजट में दस गुणा वृध्दि हुई है। उन्होंने कहा कि नगरीय निकायों के सर्वागीण विकास के लिए राज्य सरकार द्वारा अनेक योजनाएं संचालित की जा रही है। जिनमें सरोवर-धरोहर योजना, पुष्प वाटिका योजना, उन्मुक्त खेल मैदान, ज्ञानस्थली योजना, प्रतीक्षा बस स्टैंड, मुक्तिधाम, ट्रासपोर्ट नगर, गोकुल नगर, गौरव पथ, मुख्यमंत्री स्वावलम्बन योजना, महिला समृध्दि बाजार और अन्नपूर्णा सामुदायिक सेवा केन्द्र योजना प्रमुख है। इन योजनाओं के क्रियान्वयन के माध्यम से शहरी क्षेत्रों की तस्वीर बदलने लगी है।
महापौरों, अध्यक्षों एवं पार्षदों के मानदेय में वृध्दि
अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान श्री मूणत ने प्रदेश के नगरीय निकायों में निर्वाचित पदाधिकारियों के मानदेय में वृध्दि की घोषणा की। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा इन पदाधिकारियों के मानदेय में वृध्दि की जा रही है, जिसके अनुसार नगर पालिक निगमों के महापौरों का मानदेय 3500 रूपए प्रतिमाह से बढ़ाकर 11 हजार रूपए प्रतिमाह और अध्यक्षों का मानदेय तीन हजार से प्रतिमाह से बढ़ाकर नौ हजार रूपए प्रतिमाह किया जा रहा है। इसके साथ ही पार्षदों के मानदेय में भी इजाफा करते हुए उनका मानदेय 2500 रूपए प्रतिमाह से बढ़ाकर छह हजार रूपए प्रतिमाह किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इसी प्रकार नगर पालिका परिषद के अध्यक्षों का मानदेय एक हजार प्रतिमाह से बढ़ाकर तीन हजार प्रतिमाह, उपाध्यक्षों का मानदेय 750 रूपए से बढ़ाकर 2400 रूपए और पार्षदों का मानदेय 500 रूपए से बढ़ाकर 1800 रूपए किया जा रहा है। नगर पंचायत अध्यक्षों का मानदेय 750 रूपए से बढ़ाकर 2400 रूपए, उपाध्यक्षों का मानदेय 500 रूपए से बढ़ाकर 2100 रूपए और पार्षदों का मानदेय 400 रूपए से बढ़ाकर 1400 रूपए प्रतिमाह किया जा रहा है। श्री मूणत ने बताया कि मानदेय में वृध्दि से राज्य शासन पर सात करोड़ रूपए का अतिरिक्त भार आएगा।
देश की शान बनेगा नया रायपुर
आवास पर्यावरण मंत्री श्री राजेश मूणत ने विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान बताया कि छत्तीसगढ़ की नई राजधानी के रूप में विकसित हो रहे नया रायपुर में आधुनिकतम अधोसंरचनाएं निर्मित की जाएगी और इसे भव्य स्वरूप देते हुए देश की सबसे सुंदर राजधानी के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यहां छह लेन और चार लेन सड़कों का निर्माण जारी है। मंत्रालय और विभागाध्यक्ष भवनों का निर्माण पूर्णता की ओर है। उम्मीद है कि इस वर्ष के अंत तक मंत्रालय भवन का निर्माण पूर्ण कर लिया जाएगा। श्री मूणत ने नगर एवं ग्राम निवेश विभाग की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग शहरों में भवन निर्माण हेतु नक्शा जमा करने के 60 दिनों के भीतर ले आउट स्वीकृत किया जाना अनिवार्य किया गया है। आने वाले समय में यही प्रक्रिया प्रदेश के अन्य शहराें में भी लागू की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण रोकने हेतु कड़े कदम उठाए गए हैं और उद्योगों से निकलने वाले ठोस अपशिष्ट के प्रबंधन की जिम्मेदारी संबंधित उद्योग को दी गयी है, इसके साथ ही वायु प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों में वायु प्रदूषण्ा नियंत्रक उपकरणों की स्थापना अनिवार्य की गयी है। राज्य सरकार द्वारा उठाए गए इन कदमों से प्रदूषण में कमी आयी है और छत्तीसगढ़ पहले जहां वायु प्रदूषण के मामले में देश में पहले स्थान पर था, अब 19वें स्थान पर आ गया है।
देश की सबसे बड़ी सुविकसित टाउनशिप होगा कमल विहार
रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी देते हुए श्री मूणत ने कहा कि लगभग साढ़े छह सौ एकड़ क्षेत्र में विकसित किए जाने वाला कमल विहार देश की सबसे बड़ी सुविकसित टाउनशिप होगा। उन्होंने बताया कि रायपुर की पुरानी गंज मंडी में 26 एकड़ क्षेत्र में रायपुर विकास प्राधिकरण और नगर निगम द्वारा संयुक्त रूप से पांच सौ करोड़ रूपए लागत का एक 18 मंजिला व्यवसायिक परिसर विकसित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्राधिकरण द्वारा रायपुरा में एक अत्याधुनिक रिक्रिएशन पार्क की स्थापना की जा रही है।
तहसील और विकासखण्ड मुख्यालयों पर बनेंगे विकास नगर
श्री मूणत ने बताया कि गरीबो, निम्न आय वर्ग के व्यक्तियों तथा जनसामान्य को सर्वसुविधा युक्त आवास उपलब्ध कराने हेतु छत्तीसगढ़ राज्य गृह निर्माण मण्डल का गठन किया गया है। मण्डल द्वारा सुव्यवस्थित आवासीय योजनाएं विकसित की जा रही है। मण्डल द्वारा अब तक लगभग एक लाख मकानों का निर्माण पूर्ण कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि मण्डल द्वारा तहसील और विकासखण्ड मुख्यालयों पर विकास नगर बनाएं जाएंगे जिसके लिए इस वर्ष बजट में प्रावधान किया गया है।
सभी जिलों में बनेंगे परिवहन कार्यालय भवन
श्री मूणत ने बताया कि प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में परिवहन कार्यालयों के भवन निर्मित किए जाएंगे। इसके साथ ही विभाग का सेटअप तैयार कर रिक्त पदों पर भर्तियां की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की पांच प्रमुख सीमा जांच चौकियों पर एकीकृत जांच चौकी की स्थापना कर भवनों का निर्माण कर लिया गया है। इन चौकियों में इलेक्ट्रानिक तौल-कांटा, वेब कैमरा और कम्प्यूटर लगाकर इन्हें कम्प्यूटराइज्ड करने की कार्रवाई की जा रही है।

