मोंगोबती के बांसशिल्प ने दिल्ली में लहराया छत्तीसगढ़ का परचम
रायपुर, 07 सितम्बर 2011
छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल बस्तर जिले की मोंगोबती के बांस शिल्प ने पूरे देश में छत्तीसगढ़ का परचम लहरा दिया है। उसे बांस शिल्प कारीगरी के क्षेत्र में राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया है। भारत की राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवी सिंह पाटिल तथा उद्योग मंत्री श्री वीरभद्र सिंह ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में दो सितम्बर को श्रीमती मोंगोबती को इस पुरसकार से सम्मानित किया गया। केन्द्रीय सूक्ष्म लघु उद्यम मंत्रालय द्वारा ग्रामोद्योग बांस शिल्प के क्षेत्र में पहली बार बस्तर की किसी महिला को यह सम्मान दिया गया है। यद्यपि विकास आयुक्त हस्तशिल्प वस्त्र मंत्रालय भारत सरकार द्वारा पूर्व में भी बस्तर सहित छत्तीसगढ़ राज्य के हुनरमंद महिला और पुरूष शिल्पकारों, कलाकारों को राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं, किन्तु सूक्ष्म एवं लघु उद्यम मंत्रालय भारत सरकार द्वारा पहली बार यह पुरस्कार बस्तर की मोंगोबती को दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि खादी और ग्रामोद्योग आयोग मुम्बई के छत्तीसगढ़ राज्य कार्यालय रायपुर द्वारा प्रायोजित 'ग्रामोद्योग सेवा केन्द्र' के अन्तर्गत जगदलपुर में संचालित एक संस्था में कार्यरत बांस शिल्पी मोंगोबती को यह राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ। मोंगोबती को इस राष्ट्रीय पुरस्कार के अन्तर्गत 25 हजार रूपए नगद, प्रशस्ति पत्र और 'मेडल' प्रदान किया गया। श्रीमती मोंगोबती बस्तर जिले के विकासखंड जगदलपुर के ग्राम नानगुर की निवासी हैं। वह 2004-05 में बांस शिल्प के प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल हुई थी। मोंगोबती ने बांसशिल्प में महारत हासिल की। मोंगोबती ने छत्तीसगढ़ में भिलाई और कांकेर में आयोजित प्रदर्शनी में हिस्सा लिया था। वहीं उसने राष्ट्रीय स्तर में भी गुवाहाटी में आयोजित प्रदर्शनी में शिरकत की थी। प्रदेश और देश में आयोजित विभिन्न प्रदर्शनियों में मोंगोबती के बांस शिल्प को काफी सराहना प्राप्त हुई।

