शिल्पियों के हाथों का कमाल देखने उमड़ा जन-सैलाब
राज्योत्सव के शिल्प ग्राम में भारी चहल-पहल

छत्तीसगढ़ के परम्परागत हस्तशिल्पियों के हाथों का कमाल देखने के लिए यहां सप्ताह व्यापी राज्योत्सव-2010 की विकास प्रदर्शनी में आज चौथे दिन की शाम भी जन-सैलाब उमड़ता रहा। शासकीय विज्ञान महाविद्यालय के मैदान में चल रही विकास प्रदर्शनी के परिसर में राज्य शासन के ग्रामोद्योग विभाग द्वारा अपने मंडप को 'शिल्प ग्राम' के रूप में सजाया गया है, जहां राज्य के सुदूर उत्तर में सरगुजा से लेकर दूर-दराज बस्तर तक और पूर्व में रायगढ़ से लेकर पश्चिम में दुर्ग एवं राजनांदगांव क्षेत्र के शिल्पियों द्वारा हस्तशिल्पी कलाकृतियों और हाथ करघा से निर्मित वस्त्रों की बिक्री एवं प्रदर्शन के लिए लगभग 75 स्टाल लगाए गए हैं। इस मंडप में राज्य सरकार के हस्तशिल्प विकास बोर्ड, खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड, हाथ करघा संचालनालय तथा रेशम संचालनालय द्वारा हस्त शिल्पियों और बुनकरों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए संचालित योजनाओं का भी सुरूचिपूर्ण प्रदर्शन किया गया है।
अनेक हस्त शिल्पियों ने चर्चा के दौरान अपनी कारीगरी के विकास के लिए प्रदेश सरकार की ओर से उन्हें दिए जा रहे सहयोग का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि इस प्रकार की प्रदर्शनियों में उनकी कलाकृतियों के लिए प्रचार-प्रसार के साथ बाजार की भी अच्छी संभावना रहती है। राज्योत्सव की इस प्रदर्शनी में उन्हें अपने सामानों के लिए ग्राहक भी मिल रहे हैं। स्कूली बच्चों ने भी बड़ी उत्सुकता से आज राज्योत्सव के शिल्प ग्राम में आकर प्रदेश के हस्तशिल्प के सौन्दर्य को बड़ी उत्सुकता से देखा। इन बच्चों ने हाथ करघा धागों के इस्तेमाल की प्रक्रिया को भी बड़ी दिलचस्पी से निहारा। शिल्प ग्राम में लोगों की भारी चहल-पहल लगातार बढ़ रही है। लौह शिल्प, बेलमेटल और टेराकोटा की प्रत्येक मूर्ति और कलाकृति जीवंत प्रतीत हो रही है। शिल्प ग्राम में परम्परागत हस्तशिल्प जैसे टेराकोटा, मिट्टी शिल्प, कौड़ी शिल्प, ढोकरा शिल्प, बांस शिल्प आदि के अदभुत और आकर्षक कलाकृतियां प्रदर्शन एवं बिक्री के लिए उपलब्ध है। शिल्प ग्राम में लोगों को शिल्पियों की कला के बेजोड़ नमूने देखने और खरीदने का अवसर मिल रहा है। शिल्प-ग्राम में कबीर कोसा बुनकर सहकारी समिति रायगढ़ द्वारा अपने स्टाल मेंं कोसे से निर्मित साड़ियां प्रदर्शन और बिक्री के रखी गयी हैं। राज्य में रेशम उद्योग के तहत कोसा कृमि पालन और हाथ करघा बुनकरों द्वारा कोसा धागाकरण तथा रेशमी कपड़ों के उत्पादन की गतिविधियां भी यहां देखी जा सकती है। शिल्पग्राम में सरगुजा जिले के ग्राम आरा के शिवमंगल राम और बस्तर जिले के कोण्डागांव के कुसकुमार कुंभकार द्वारा राज्योत्सव में उनके द्वारा टेराकोटा (मिट्टी से निर्मित) कलाकृतियों की बिक्री की जा रही है। उनके स्टालों में दीपावली त्यौहार को देखते हुए मिट्टी के दीये आदि के साथ सजावटी सामान भी रखे गए हैं। जगदलपुर से श्री महेन्द्र सिंह एवं रायपुर जिले के भाटापारा से श्री पंकज वर्मा काष्ठ शिल्प और रायगढ़ से विनोद कुजूर लाख से निर्मित वस्तुएं लेकर राज्योत्सव के विकास प्रदर्शनी में शामिल हुए हैं। उनके द्वारा निर्मित कलाकृतियों को भी लोग खरीद रहे है, और प्रशंसा कर रहे है।

