शानदार कामयाबी : बस्तर जिले में सिंचाई क्षमता के साथ बढ़ा खेती का रकबा
सिंचित रकबे में 17 हजार हेक्टेयर की वृध्दि
रायपुर 02 दिसम्बर 2011
राज्य
सरकार के जल संसाधन विभाग द्वारा लगातार किए जा रहे प्रयासों के फलस्वरूप
छत्तीसगढ़ के बस्तर (जगदलपुर) जिले में खेती के सिंचित रकबे को बढ़ाने में
शानदार कामयाबी हासिल की गयी है। राज्य निर्माण के समय वर्ष 2000 में जहां
इस जिले में सिंचित रकबा 15 हजार 427 हेक्टेयर था, वहीं चालू वर्ष 2011 में
यह बढ़कर 32 हजार 443 हेक्टेयर तक पहुंच गया। इस प्रकार जिले में सिंचाई
क्षमता विगत ग्यारह वर्षों में 4.69 प्रतिशत से बढ़कर 9.54 प्रतिशत तक पहुंच
गयी है।
विभागीय अधिकारियों ने आज यहां बताया कि इस अवधि में बस्तर जिले में खेती
का रकबा भी लगभग तीन लाख 29 हजार से बढ़कर तीन लाख 40 हजार हेक्टेयर तक
पहुंच गया है। इस प्रकार वहां खेती के सिंचित रकबे में लगभग 17 हजार
हेक्टेयर की वृध्दि रिकार्ड की गयी है। सिंचाई का रकबा बढ़ने पर जिले के
किसान खरीफ के साथ-साथ अब रबी मौसम की फसलें भी उगाने लगे हैं। इतना ही
नहीं बल्कि सिंचाई क्षमता बढ़ने पर जिले में खरीफ फसलों को प्रति हेक्टेयर
उत्पादन भी 15 क्विंटल से बढ़कर 26 क्विंटल हो गया है। इसके साथ ही जिले में
पिछले वर्ष 2010 में प्रति हेक्टेयर 30 क्विंटल से 35 क्विंटल तक रबी
फसलों का उत्पादन रिकार्ड किया गया। इससे किसानों को अच्छी आमदनी हुई।
अधिकारियों के अनुसार जिले में जल संसाधन विभाग द्वारा विगत ग्यारह वर्ष
में एक मध्यम सिंचाई परियोजना, एक व्यपवर्तन योजना और सहित पांच लघु सिंचाई
तालाब योजनाओं,, दो उद्वहन सिंचाई योजनाओं, 194 स्टापडेमों, 19 एनीकटों
और 28 नलकूप योजनाओं के निर्माण के जरिए 17016 हेक्टेयर अतिरिक्त रकबे में
सिंचाई क्षमता में वृध्दि की गयी है। इस वक्त जिले में 14 स्टॉपडेमों औरा
14 एनीकटों का निर्माण किया जा रहा है, जिनके पूर्ण होने पर चार हजार 458
हेक्टेयर में अतिरिक्त सिंचाई क्षमता निर्मित होगी। जिले की सिंचाई क्षमता
बढ़ाने में कोसारटेडा मध्य सिंचाई परियोजना की भी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जा
रही है। उल्लेखनीय है कि यह बस्तर जिले की सबसे बड़ी सिंचाई परियोजना है,
जो विभिन्न कारणों से लगभग 27 वर्षों तक लंम्बित रहने के बाद मुख्यमंत्री
डॉ. रमन सिंह के विशेष प्रयासों से वर्ष 2008 में धरातल पर साकार हुई। जून
2008 में इस सिंचाई जलाशय के लिए नाला क्लोजर का काम पूर्ण कर लिया गया।
बांध निर्माण से क्रमष: वर्ष 2008 में तीन हजार हेक्टेयर, वर्ष 2009 में
पांच हजार हेक्टेयर, पिछले वर्ष 2010 में आठ हजार हेक्टेयर और चालू वर्ष
2011 में अब तक नौ हजार हेक्टेयर क्षेत्र में किसानों सिंचाई सुविधा दी
गयी। अधिकारियों ने बताया कि मार्च 2012 तक इस परियोजना में लक्ष्य के
अनुसार ग्यारह हजार 120 हेक्टेयर की सिंचाई क्षमता निर्मित कर ली जाएगी।
इसमें सात हजार 360 हेक्टेयर का रकबा खरीफ फसलों का और तीन हजार 760
हेक्टेयर रबी फसलों का होगा। चालू वर्ष 2011 में अल्प वर्षा को देखते हुए
अब तक तीन हजार 800 हेक्टेयर में खरीफ फसलों के लिए पानी दिया जा चुका है।
रबी फसलों की सिंचाई के लिए इस वर्ष दो हजार 660 हेक्टेयर में पानी देने का
लक्ष्य है। राज्य सरकार की नीति के अनुसार कोसारटेडा जलाषय के डूबान
क्षेत्र से प्रभावित परिवारों को रोजगार देने के लिए मछुआ सहकारी समिति
पंजीकृत की गई है, जिसमें 200 सदस्य हैं।
अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2008-09 में कोसारटेडा जलाषय में परियोजना मद
से 6 लाख स्टेण्डर्ड-फ्राय मत्स्य बीज का संचय किया था। समिति के सदस्यों
को विभागीय योजना से जोड़कर मछली पालन हेतु नाव-जाल सहायता सामग्री दी गई है
तथा इन दोनों समितियों को पट्टे पर आवंटित कर इस वित्तीय वर्ष में नदी और
जलाषयों में मत्स्य बीज संचयन योजना से जलाषय में 15 लाख 30 हजार
स्टेण्डर्ड-फ्राय छह लाख 50 हजार स्टेण्डर्ड-फ्राय और स्वयं के क्रय द्वारा
40 हजार स्टेण्डर्ड-फ्राय बीज समिति को अनुदान योजना अंतर्गत मत्स्य बीच
का संचयन किया गया है। वर्ष 2010-11 में एन.एफ.डी. योजना के अन्तर्गत 7.5
लाख ''फिंगरलिंग-मछली'' का संचय किया गया, वर्ष 2011-12 में 2.80 लाख
फिंगरलिंग मछली बीजों का संचय कर अब तक मछुआरा समिति द्वारा 14 लाख रूपए से
भी अधिक मुनाफा हासिल किया जा चुका है।
क्रमांक.-3931/स्वराज्य

