छत्तीसगढ़ के गांवों में पेयजल का पुख्ता इंतजाम
राज्य सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ में शुध्द पेयजल उपलब्ध कराने के साथ ही स्वच्छ वातावरण बनाने विशेष प्रयास किये जा रहे हैं। लोगों के स्वस्थ जीवन के लिए शुध्द जल और स्वस्थ पर्यावरण का होना बहुत जरूरी है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की सरकार ने छत्तीसगढ़ के गांवों में भरपूर पेयजल की व्यवस्था कर दी है। छत्तीसगढ़ में प्रत्येक 80 लोगों पर पर एक हैंडपम्प उपलब्ध कराया जा चुका है, जबकि राष्ट्रीय औसत ढाई सौ की आबादी पर एक हैण्डपंप की है। छत्तीसगढ़ की ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को राष्ट्रीय औसत से भी ज्यादा कामयाबी मिली है। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में 2 लाख 15 हजार 418 हैण्डपंपों, एक हजार 813 नलजल प्रदाय योजनाओं, एक हजार 875 स्थल जल प्रदाय योजनाओं एवं 27 हजार 226 शालाओं में हैण्डपंप के माध्यम से शुध्द पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। पेयजल निरंतर उपलब्घ कराने हेतु आदिवासी बाहुल्य 9 जिलों में एक-एक चलित प्रयोगशाला का प्रावधान किया गया है। इससे दूरस्थ अंचल के ग्रामों के पेयजल नमूनों के तत्काल परीक्षण कर समस्या का निराकरण्ा किया जा सकेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यकता के अनुरूप तुरन्त नलकूप खनन हेतु वर्तमान में कार्यरत 50 विभागीय मशीनों के साथ 10 नई रिंग मशीने क्रय की जा रही है। इन मशीनों से दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में भी नलकूप खनन संभव हो सकेगा।
बस्तर जिले की फ्लोराईड प्रभावित 29 ग्रामों एवं राजनांदगांव जिले के आर्सेनिक प्रभावित ग्रामों में शुध्द पेयजल उपलब्ध कराने के लिए 80 करोड़ पांच लाख की योजना का क्रियान्वयन किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में समुचित शुध्द पेयजल निरंतर उपलब्ध रहे इसके लिए नलकूप खनन के अतिरिक्त इस वित्तीय वर्ष में 470 नई नलजल योजना, 331 नई स्थल जल प्रदाय योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इसी प्रकार इस वित्तीय वर्ष में 2 हजार 31 शालाओं एवं एक हजार 440 आंगनबाड़ियों में भी शुध्द पेयजल उपलब्ध कराए जाने के कार्य भी हाथ में लिए गए है। ग्रामीण शालाओं में टंकी और फोर्स लिफ्ट पंप के माध्यम से नलों द्वारा निरंतर पेयजल सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। राज्य शासन द्वारा इस वर्ष 6000 शालाओं में फोर्स लिफ्ट पंप लगाने का प्रस्ताव है।
शहरी क्षेत्रों में पर्याप्त शुध्द पेयजल उपलब्ध कराने के लिए दस करोड़ दस लाख से 12 नई नगरीय योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इसी प्रकार 19 नवगठित नगर पंचायतों में शुध्द पेयजल उपलब्ध कराने हेतु 11 करोड़ 66 लाख 10 हजार से इन योजनाओं को क्रियान्वयन किया जा रहा है।
राज्य में सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान के कार्यों का प्रभावी क्रियान्वयन करते हुए अभी तक 693 ग्राम पंचायतों को निर्मल ग्राम पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान के तहत 62 करोड़ 32 लाख के कार्य भी इस वित्तीय वर्ष में संपादित कराए जा रहे हैं। राज्य सरकार सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान के द्वारा व्यक्तिगत, शालेय एवं आंगनबाड़ी शौचालय के माध्यम से निर्मल ग्राम की अवधारणा को सुनिश्चित करने हेतु प्रयासरत है। इस अभियान में नई पीढ़ी अर्थात् आंगनबाड़ी से स्कूल शिक्षा तक के बालक-बालिकाओं को मुख्य रूप से लक्षित किया गया है। जब ये बालक-बालिकाएं एक जिम्मेदार नागरिक बने तो स्वच्छता उनके व्यक्तित्व का अभिन्न अंग रहे। छत्तीसगढ़ राज्य में स्वच्छता अभियान को सफल बनाने एवं सामयिक चुनौती का सामना करने के लिए अनेक नवाचार प्रारंभ किये गए हैं। इस अभियान में सक्रिय योगदान देने वाले जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कर्मचारियों को 'मुख्यमंत्री ग्राम स्वच्छता पुरस्कार' देने की घोषणा की गई है। इसी अभियान में जनसामान्य को जोड़ने एवं उनकी सक्रिय भागीदारी हेतु लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसके अलावा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, महिला स्व-सहायता समूहों, छत्तीसगढ़ राज्य स्काउट गाईड तथा राष्ट्रीय सेवा योजना को भी इस कार्यक्रम से जोड़ा गया है। इनके द्वारा गांवों में बनाए गए शौचालयों के उपयोग को निरंतर बढ़ावा दिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा कक्षा पहली से दसवीं तक के पाठयक्रमों में स्वच्छता के साथ जल की गुणवत्ता, संरक्षण, संवर्धन को शामिल करने का निर्णय लिया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में ए.पी.एल. परिवारों को व्यक्तिगत शौचालय निर्माण के लिए 1900 रूपए की अनुदान राशि दी जा रही है।
राजधानी रायपुर में लगभग 303 करोड़ 64 लाख रूपए की लागत से निर्माणाधीन रायपुर आवर्धन जलप्रदाय योजना का करीब 95 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीनीकरण मिशन के तहत राज्य शासन के प्रस्ताव पर स्वीकृत इस विशेष प्रोजेक्ट का निर्माण प्रथम चरण में वर्ष 2023 की अनुमानित 15 लाख 33 हजार की जनसंख्या और द्वितीय चरण के लिए वर्ष 2038 की 21 लाख 35 हजार की अनुमानित जनसंख्या को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट में राजधानी रायपुर से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित रविशंकर सागर जलाशय (गंगरेल बांध) से पानी लाकर शहर वासियों को प्रति दिन प्रति व्यक्ति 135 लीटर शुध्द पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।

