परिचय
छत्तीसगढ़ के प्रथम
निर्वाचित मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह का जन्म वर्तमान कबीरधाम कवर्धा जिले
के ग्राम ठाठापुर ;अब रामपुर में एक कृषक परिवार में 15 अक्टूबर 1952 को
हुआ। यह गांव जिला मुख्यालय कवर्धा से लगभग 22 किलोमीटर की दूरी पर स्थित
है। उनके पिता स्वर्गीय ठाकुर विघ्नहरण सिंह कबीरधाम जिले के वरिष्ठ समाज
सेवी और प्रतिष्ठित अधिवक्ता थे, उनकी माता स्वर्गीय श्रीमती सुधा सिंह
धार्मिक प्रकृति की सहज.सरल गृहिणी थीं। डॉ. रमन सिंह के सुपुत्र श्री
अभिषेक सिंह एम.बी.ए. की उपाधि सहित मेकेनिकल इंजीनियरिंग स्नातक और
सुपुत्री कुमारी अस्मिता सिंह एक प्रतिभावान दंत चिकित्सक हैं।
वर्ष 2003 में हुए राज्य विधानसभा के प्रथम आम चुनाव में भारतीय
जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में
पार्टी को भारी बहुमत से सरकार बनाने का अवसर मिला और उन्होंने प्रदेश के
प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री के रूप में 07 दिसम्बर 2003 को राजधानी
रायपुर के पुलिस परेड मैदान में आम जनता के बीच शपथ लेकर सरकार की बागडोर
सम्हाली। डॉ. सिंह ने राज्य विधानसभा के द्वितीय आम चुनाव में 14 नवम्बर
2008 और 20 नवम्बर 2008 को हुए मतदान तथा 08 दिसम्बर 2008 को हुई मतगणना
में पार्टी को सुस्पष्ट बहुमत मिलने और 10 दिसम्बर को भाजपा विधायक दल के
नेता निर्वाचित होने के बाद 12 दिसम्बर 2008 को रायपुर के उसी पुलिस परेड
मैदान में एक बार फिर प्रदेश के निर्वाचित मुख्यमंत्री के रूप में जनता की
सेवा करने की शपथ ली।
उल्लेखनीय है कि डॉ. रमन सिंह की प्रारंभिक शिक्षा खैरागढ़, कवर्धा और राजनांदगांव में हुई। उन्होंने वर्ष 1975 में रायपुर के शासकीय आयुर्वेदिक चिकित्सा महाविद्यालय से बी.ए.एम.एस. की उपाधि प्राप्त की। श्री रमन सिंह, डॉक्टर बनकर गरीबों की सेवा करना चाहते थे। इसके लिए वे आयुर्वेदिक महाविद्यालय रायपुर में प्रवेश लेने से पहले प्री-मेडिकल परीक्षा (पी.एम.टी.) भी उत्तीर्ण कर चुके थे, लेकिन उम्र कम होने के कारण उन्हें एम.बी.बी.एस. में दाखिला नहीं मिल पाया, लेकिन बाद में आयुर्वेदिक महाविद्यालय से बी.ए.एम.एस. की डिग्री लेकर उन्होंने डॉक्टरी शुरू की और एक लोकप्रिय आयुर्वेदिक डॉक्टर के रूप में प्रसिध्द हुए। उन्होंने अपने गृह नगर कवर्धा के ठाकुरपारा में निजी डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस करते हुए गरीबों का नि:शुल्क इलाज किया और गरीबोें के डॉक्टर के रूप में उन्हें विशेष लोकप्रियता मिली।
छात्र जीवन में डॉ. सिंह क्रिकेट और व्हालीबाल के अच्छे खिलाड़ी भी रहे। उनके बेहद शांत, सौम्य और सहज-सरल स्वभाव के कारण आम-आदमी को उनके नजदीक पहुंचकर अपनत्व का अनुभव होता है। अत्यंत शालीन और व्यवहार कुशल श्रीमती वीणा सिंह डॉक्टर साहब की धर्म पत्नी तथा अभिषेक सिंह उनके सुपुत्र और अस्मिता सिंह उनकी सुपुत्री हैं। जन-सेवा और लोक-कल्याण की भावना से परिपूर्ण डॉ. रमन सिंह ने व्यक्तिगत रूप से समाज सेवा की अभिरूचि के कारण अपने जीवन को बड़े लक्ष्य के लिए समर्पित करने का निर्णय लिया। इस तरह डॉ. रमन सिंह का राजनीतिक सफर 1976-77 में शुरू हुआ। वे तत्कालीन भारतीय जनता युवा मोर्चा, कवर्धा के प्रथम अध्यक्ष निर्वाचित हुए। इसके बाद वे वर्ष 1983-84 में शीतला वार्ड से कवर्धा नगरपालिका के पार्षद निर्वाचित हुए। वर्ष 1990-92 और वर्ष 1993-98 तक वे तत्कालीन मध्यप्रदेश विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के विधायक रहे। इस दौरान उन्होंने विधानसभा की लोक-लेखा समिति के सदस्य और विधानसभा की पत्रिका 'विधायिनी' के संपादक के रूप में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।
वर्ष 1999 के लोकसभा चुनाव में वे राजनांदगांव क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी के रूप में विजयी हुए। डॉ. रमन सिंह की प्रतिभा और लोकप्रियता को देखते हुए प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें केन्द्रीय मंत्रिमंडल में शामिल कर वाणिज्य एवं उद्योग राज्यमंत्री बनाया। डॉ. सिंह ने इस विभाग में केन्द्रीय राज्यमंत्री के रूप में अपनी कुशल प्रशासनिक क्षमता का परिचय दिया। डॉ. सिंह ने राष्ट्रमंडलीय देशों के संसदीय संघ की छठवीं बैठक में हिस्सा लिया। इसके इलावा उन्होंने इजराइल, नेपाल, फिलीस्तीन और दुबई में आयोजित भारतीय व्यापार मेले में भी देश का नेतृत्व किया।
छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद डॉ. रमन सिंह की कुशल संगठन क्षमता को ध्यान में रखकर भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें छत्तीसगढ़ में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के पद पर नियुक्त किया। डॉ. सिंह ने केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्यमंत्री के पद से त्याग पत्र देकर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली। विगत 01 दिसम्बर 2003 को हुए छत्तीसगढ़ राज्य विधानसभा के प्रथम आम चुनाव में पार्टी ने भारी बहुमत से सरकार बनाने का जनादेश प्राप्त किया और 04 दिसम्बर 2003 को हुई मतगणना के बाद भारतीय जनता पार्टी के नव-निर्वाचित विधायकों ने 05 दिसम्बर 2003 को रायपुर में आयोजित अपनी बैठक में उन्हें सर्वसम्मति से विधायक दल का नेता चुन लिया। डॉ. रमन सिंह ने राजधानी रायपुर के पुलिस परेड मैदान में 07 दिसम्बर 2003 को आम-जनता के बीच आयोजित एक गरिमामय समारोह में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में लोकसभा, नगरीय निकाय, त्रिस्तरीय पंचायत राज संस्थाओं के चुनाव में भाजपा को भारी सफलता मिली।
मुख्यमंत्री के रूप में अपने पांच वर्ष के प्रथम कार्यकाल में डॉ. रमन सिंह ने राज्य में अनेक जन-कल्याणकारी योजनाएं शुरू की। जरूरतमंद तबकों तक सीधी पहुंच की कारगर सोच के कारण, अभिनव योजनाओं को प्रखर सफलता मिली। वर्ष 2005 में एक समाचार पत्रिका 'इंडिया टुडे' नई दिल्ली द्वारा कराए गए सर्वेक्षण में डॉ. रमन सिंह को देश का सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्री घोषित किया गया। महाराष्ट्र तकनीकी संस्थान (एम.आई.टी.) द्वारा पुणे में विगत तीन फरवरी 2008 को आयोजित समारोह में डॉ. रमन सिंह को भारत अस्मिता श्रेष्ठ जनप्रतिनिधि एवार्ड 2008 के अलंकरण से सम्मानित किया गया। सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति के.जी.बालकृष्णन के हाथों डॉ. रमन सिंह को यह प्रतिष्ठित लाईफ टाईम एचिव्हमेंट एवार्ड प्राप्त हुआ। भारतीय लोकतंत्र के विकास और प्रजातंत्र को सुदृढ़ बनाने में उनके योगदान के लिए उन्हें यह गौरवपूर्ण सम्मान प्रदान किया गया।
केन्द्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों द्वारा भी डॉ. रमन सिंह के सुदक्ष एवं कुशल मुख्यमंत्रित्व की सराहना समय-समय पर की गई। डॉ. रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के रूप में ब्रिटेन, फ्रांस तथा स्विट्जरलैण्ड प्रवास कर निवेशकों एवं भारतवंशियों से भेंट कर उन्हें छत्तीसगढ़ में निवेश हेतु आमंत्रित किया। उनकी प्रेरणा से बनाई गई नई आकर्षक उद्योग नीति को व्यापक सराहना मिली एवं वर्ष 2004-05 में छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक औद्योगिक निवेश सुनिश्चित किया गया। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा जारी बुलेटिन में विभिन्न राज्यों के तुलनात्मक निवेश के आंकड़ों में छत्तीसगढ़ को सर्वप्रथम बताया गया।
मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जाति-जनजाति तथा पिछड़े वर्गों के उत्थान के साथ ग्रामीणों और किसानों की बेहतरी के लिए अनेक महत्वपूर्ण और अभिनव योजनाएं प्रारंभ की हैं, जिनमें लगभग 36 लाख गरीब परिवारों के लिए तीन रूपए किलो चावल वितरण की मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना, 25 पैसे किलो में नमक वितरण योजना, लगभग नौ लाख गरीब परिवारों के लिए नि:शुल्क एकलबत्ती कनेक्शन, एक लाख से अधिक किसानों को सिंचाई पम्प कनेक्शन, सहकारी समितियों के माध्यम से प्रदेश के किसानों को सिर्फ तीन प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण सुविधा, तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए नि:शुल्क चरण पादुका वितरण, लाखों स्कूली बच्चों को नि:शुल्क पाठय पुस्तक वितरण जैसी अनेक योजनाएं शामिल हैं।
डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व के प्रथम पांच वर्ष के कार्यकाल में जहां छत्तीसगढ़ को देश के प्रथम विद्युत कटौती मुक्त राज्य के रूप में एक नयी पहचान मिली, वहीं उन्होंने छत्तीसगढ़ की आम जनता की बोलचाल की भाषा 'छत्तीसगढ़ी' को राजभाषा का दर्जा दिलाया। राजधानी रायपुर के नजदीक एक विशाल अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण भी डॉ. रमन सिंह के प्रथम कार्यकाल में हुआ। उन्होंने शासकीय कर्मचारियों को केन्द्र के समान छठवां वेतन मान स्वीकृत किया और हजारों दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को नियमितिकरण के जरिए नौकरी में एक सुरक्षा की भावना प्रदान की। ग्राम सुराज अभियान के माध्यम से राज्य के दूर-दराज गावों तक जनता के बीच अचानक पहुंच कर लोगों के दुख-दर्द को जानने, समझने और यथासंभव तुरंत हल करने की उनकी अनोखी शैली ने भी जनता का दिल जीत लिया है। डॉ. रमन सिंह ने अपने नेतृत्व की दूसरी पारी में सर्वाधिक गरीब, अन्त्योदय राशन कार्ड धारक परिवारों को सिर्फ एक रूपए किलो में और बाकी सभी गरीबों को दो रूपए किलो में चावल उपलब्ध कराने तथा किसानों को ब्याज मुक्त कृषि ऋण सुविधा प्रदान करने सहित अनेक जन-कल्याणकारी घोषणाएं की हैं और कहा है कि घोषणा पत्र के सभी वायदों को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ पूर्ण किया जाएगा। छत्तीसगढ़ को देश के एक आदर्श और खुशहाल राज्य के रूप में विकसित करना उनका भी उनका एक प्रमुख लक्ष्य होगा।
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